प्रदेश में बहुत बड़े भ्रष्टाचार के खेल का हुआ पर्दाफाश

0
77

क्राइम रिपोर्ट/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ बेतवा भूमि समाचार/ देवेंद्र कुमार टाक : प्रदेश में आए दिन घूसखोरी और भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ रहे हैं और कई अधिकारी इसमें लिप्त होने के कारण उनकी गिरफ्तारियां भी हो रही है-प्रदेश में बहुत बड़े भ्रष्टाचार के खेल का हुआ पर्दाफाश

प्रदेश में बहुत बड़े भ्रष्टाचार के खेल का हुआ पर्दाफाश

इसी के बीच एक ऐसे बहुत बड़े भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश हुआ है जिसमें अफीम का ग्रेट बढ़ाने से लेकर, फसल की बुवाई-फसल खराब दिखाकर बीमा कंपनी से पैसा एठने के लिए एवं चुरा जलने से बचाने के लिए, और अवैध बिक्री करने के लिए नारकोटिक्स एवं पुलिस अधिकारी द्वारा रिश्वत में बहुत मोटी रकम लेने का खुलासा हुआ है- जिसका खुलासा पत्रकार ओम प्रकाश शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में किया है

अफीम की खेती और पूरी की पूरी वीडियो को बर्बाद कर रही है, अफीम की तस्करी के गढ़ माने जाने वाले मेवाड़ में मालवा में किसानों व तस्करों के बीच 3 दिन गुजारे तो पता चला कि किसान-नारकोटिक्स व पुलिस का पग-पग पर गठजोड़ इस 17232 करोड़ के काले कारोबार के पीछे हैं

इसमें 13256 करोड़ रूपए की अफीम और 3976 करोड़ रुपए के डोडा- चूरा की तस्करी शामिल है, संवाददाता चित्तौड़ के बेगू पहुंचा तो भवानी नाम के तस्कर ने बताया कि राजस्थान में हर साल 1657 क्विंटल अफीम और 49700 क्विंटल डोडा- चूरा की तस्करी हो रही हैं-प्रदेश में बहुत बड़े भ्रष्टाचार के खेल का हुआ पर्दाफाश

नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी किसानों से 90 करोड़ रुपए की घूस की वसूली करते हैं यानी अवैध रूप से उगाई गई प्रति किलो अफीम पर 7 हजार रुपए लेते हैं, पुलिस की कमाई इससे भी ज्यादा है, पुलिस वाले एक पिक अप के लिए नाकाबंदी हटाने के 25 हजार रुपए और अधिकारी 50 हजार रुपए लेते हैं

वही ट्रक पास कराने का खर्च 3 लाख रुपए तक है, मामले पर डीजीपी  एम एल लाठर ने कहा कि तस्करों से मिले पुलिस वालों को चिन्हित किया जा रहा है, इन पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी,  संवाददाता को जिले के ही कनेरा में अफीम किसान रूपाराम मिला, वह बोला कि चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, झालावाड़ और कोटा में आधा-आधा बीघा (11 आरी) पट्टों के 33145 किसान हैं

किसान रूपाराम ने कहा कि हम किसान लोग क्या करें साहेब, सरकार सबसे अच्छी अफीम भी हमसे 3000 रुपए प्रति किलो खरीदती है हैं, जबकि बाहर यही अफीम 1.5 लाख रुपए में बिकती है, फलोदी वाले तो  इस अफीम के 3.5 लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से दे देते हैं, ऐसे ही डोडा- चुरा सरकार हमसे 100 रुपए मीटर खरीदती हैं, जबकि बाहर यह 1000 रुपए प्रति किलो और फलौदी में 3000 रुपए प्रति किलो बिकता है, 

आइए हम आप को समझाते हैं अमल के घूसखोरी का पूरा गणित : अमल की बुवाई पर 16 करोड़ रुपए की घूस , फसल को खराब दिखाने के लिए 8 करोड़ रुपए की घूस, और सूरज जलने से बचाने के लिए  66 करोड़ रुपए की घूस की वसूली नारकोटिक्स एवं पुलिस के अधिकारियों द्वारा किसानों से वसूली जाती है- जो कि अवैध है गैरकानूनी है

1.भाई होते ही नारकोटिक्स के अधिकारी रकबे की नपाई करते हैं, किसान ते जमीन से ज्यादा में बुवाई कर सके, इसकी एवज में हर किसान से नारकोटिक्स के अधिकारी 5 हजार रुपए घूस लेते हैं यानी सभी पटवारी किसानों से ली गई रिश्वत को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा लगभग 16 करोड़ रुपए होता है

2. 25 फ़ीसदी चाहते किसानों की फसल बरसात और ओलों से खराब दिखा दी जाती है, इसके लिए नारकोटिक्स के अधिकारी प्रती किसान से 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हैं, यानी कुल  रिश्वत का आंकड़ा 8 करोड़ रुपए होता है 

3. नियमानुसार अफीम निकालने के बाद फसल नष्ट की जाती है, इसका वीडियो बनता है लेकिन नारकोटिक्स वाले कपास व कचरे का चलता वीडियो बनाने के लिए प्रति किसान से 20 हजार रुपए ले रिश्वत में लेते हैं, यानी कुल रुपयों का जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा लगभग 66 करोड़ रुपए होता है

4. तस्करी के लिए भराई के दौरान पुलिस पिकअप के 50 हजार रुपए व ट्रक के 3 लाख रुपए घूस लेती हैं, इतनी ही राशि नारकोटिक्स के अधिकारी भी लेते हैं, फिर नाकाबंदी हटाने के लिए 25 हजार रुपए हर एक्टिव थाने के थानाधिकारी लेते हैं

जैसा कि हमने आपको पूर्व में भी बताया था कि घूसखोरी देश में व्याप्त एक बहुत बड़ी समस्या है, इसके कारण आम आदमी के तरक्की में एवं देश की उन्नति में एक बहुत बड़ी बाधा है, आज हर सरकारी कार्यालय, अधिकारी और कर्मचारी बिना रिश्वत लिए छोटे से छोटा कार्य तक नहीं करते हैं

यह बहुत ही शर्मनाक है, यह एक मानवाधिकार का हनन है, देश की अखंडता एवं अराजकता पर बुरा प्रभाव है, ऐसे अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निष्कासित करना एवं उनको जेल भेजना देश हित में बहुत ही नेक कदम होगा, इस रिश्वतखोरी ने देश में गरीबी, बेरोजगारी, और भुखमरी को बढ़ावा दिया है,इससे देश की उन्नति पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है- 

इस खबर में जो भी हमने जनता को बताया है वह चित्तौड़गढ़ के बेगू, कनेरा, बस्सी, कपासन, गंगरार व अन्य गांव के किसानों व उनसे माल खरीदने वाले तस्करों से मिली जानकारी के अनुसार हमने यह समाचार प्रसारित किया है

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक   E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

कृपया सभी जन मास्क लगाए।  सोशल दुरी रखे।  बार – बार अपने हाथों को साबुन या सेनेटाइजर साफ़ करिये। भीड़ – भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचिए। अपना और अपने परिवार वालों का अपने बच्चो का ख्याल रखिये।  स्वस्थ्य रहिये – सुरक्षित रहिये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here