नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क और शरीर रहते हैं हमेशा स्वस्थ

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उदयपुर/ राजस्थान/ भारत/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : भारतीय संस्कृति एवं हिंदू मान्यताओं में योग एक महत्वपूर्ण क्रिया हैं- योग गुरु श्री रामदेव बाबा का कहना है कि दुनिया में ऐसी कोई भी बीमारी नहीं है जो योग से ठीक नहीं हो सकती है- योग एवं आयुर्वेदिक भारत की ही देन है- दुनिया को योग एवं आयुर्वेदिक विज्ञान का ज्ञान भारत ने ही दिया है-नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क और शरीर रहते हैं हमेशा स्वस्थ

आज करोड़ों लोग प्रतिदिन योग करके स्वस्थ्य और सुखी जीवन व्यतीत कर रहे है , योग को विज्ञान ने भी माना है, विज्ञान भी कहता है कि अगर आप प्रतिदिन सुबह योग एवं प्राणायाम करेंगे तो आप का मन- मस्तिष्क- एवं शरीर हमेशा शांत- स्वच्छ एवं तंदुरुस्त रहेगा

नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क और शरीर रहते हैं हमेशा स्वस्थ

आज 21 जून का दिन है और यह विश्व योगा दिवस के रूप में पूरे संसार में मनाया जाता है- संसार के सभी देशों में  करोड़ों लोग रोजाना योगा करते हैं और योग को महत्व देते हैं एवं दूसरे लोगों को भी योगा करने के लिए प्रेरित करते हैं, आज ही के दिन योगा की महत्वता को बताते हुए हम आपको कुछ सरल एवं महत्वपूर्ण आसन बताएंगे और यह भी बताएंगे कि उन आसन को कैसे करते हैं और इन्हें  करने से शरीर में क्या फायदे होते हैं- तो आइए जानते हैं विस्तार से …….. 

1. योगेंद्र प्राणायाम : प्राण का अर्थ है हमारी ऊर्जा और आयाम यानी नियंत्रण या नियमन करना- योगेंद्र प्रणब के लिए हाथों को घुटनों पर रखकर बैठ जाएं, निगाह सामने किसी बिंदु पर स्थिर करें यह आंखें बंद रखें, हाथों को पसलियों के किनारों पर रखें सांस लेते और छोड़ते हुए छाती का फैलना और सिकुड़ना महसूस करें, पसलियों के भीतर की मांस पेशियों के विस्तार और संकुचन को महसूस करें, श्वास लेने और छोड़ने का समय समान रखें- यह अभ्यास रोजाना चार-पांच बार करें- 

लाभ : इसे करने से फेफड़ों की क्षमता बेहतर होती है अस्थमा के रोगियों के लिए यह सबसे अच्छा प्राणायाम है पसलियों के भीतर की मांसपेशियों का व्यायाम और विकसित होता है

कुल 12 प्रणाम (सूर्य नमस्कार) है व्यक्ति को सभी प्राणायाम 5- 5 मिनट के लिए करने चाहिए, हर एक प्राणायाम के अलग-अलग फायदे हैं, आप लगातार एक माह तक यह सभी आसन एवं प्राणायाम निरंतर रूप से करें आपको जल्द ही महसूस होगा कि आपके शरीर में एक अजब सी उर्जा उत्पन्न होगी एवं आपका मन मस्तिष्क एकदम शांत होगा एवं तनाव से मुक्ति मिलेगी

2.यष्टिकासन : यह आसन मन को शांत बनाए रखने वाला सबसे सरल आसन है – इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं, स्वास लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए जमीन पर टिका दें, पांव के पंजों से शरीर के निचले हिस्से को खींचे और हाथों से शरीर के ऊपरी हिस्से को श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आएं, इस प्रक्रिया को 4 बार दोहराएं श्वसन क्रिया के तीन भाग हैं पूरक, कुंभक, रेचक पूरक में 3 सेकंड तक सांस ले, कुंभक में 6 सेकंड तक सांस को अंदर रोकना है और रेचक में 3 सेकंड में सांस छोड़ना है

लाभ : यह आसन चित्र को एकाग्र एवं अशांत मन को शांत करता है तनाव और थकान में लाभदायक हैं शरीर में रक्त के प्रभाव को भी ठीक करता है

3.उत्कटासन : पुत्र यानी उठा हुआ और कट यानी कमर- इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं, पैरों के बीच 1 फुट की दूरी बनाएं और आंखों को सीधे एक बिंदु पर केंद्रित करें, सांस भरते हुए दोनों हाथों को कंधे के स्तर तक उठाएं शरीर को बैठने की स्थिति में तब तक नीचे करें जब तक कि जांगे पिंडलियों को ना दबाने लगे, तुरंत सांस छोड़ें सांस भरते हुए पंजों के बल पर बैठे सांस को 6 सेकंड के लिए रोके, सांस छोड़ते समय प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं

लाभ : यह आसन जोड़ो, पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है, निचले अंगों की मांसपेशियों को मजबूत और कौन करता है और इसके साथ ही शरीर की संतुलन क्षमता भी बढ़ाता है

4. कुंभकासन : इस आसन को करने के लिए पहले पेट के बल लेट जाएं, कोहनी और हाथ के पंजे भूमि पर रखें, अब हाथों की उंगलियां दूर दूर करें, हाथों पर जोर देते हुए छाती, पेट और हिप्स को ऊपर उठाते हुए पैर के पंजों को सीधे कर दें, इससे शरीर का भार हाथ के पंजे, कोहनी और पैर के पंजो पर आ जाता है, रीड की हड्डी और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें, शुरुआत में इस आसन को 1 मिनट तक करें, फिर धीरे-धीरे इसे 5 मिनट तक ले जाएं

लाभ : इस आसन को करने से भुजाएं, रीड की हड्डी, सीना और जांघों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, अगर नियमित किया जाए तो 1 महीने में ही मोटे पेट में कमी साफ देखी जा सकती है

5. विरासन : इस आसन को करने के लिए पैरों की उंगलियों पर बैठ जाएं, हाथों को घुटनों पर रखें, पीठ सीधी रखें, सामान्य श्वास के साथ आंखें बंद कर लें और थोड़ी देर तक ऐसी स्थिति में बने रहें,दोनों हथेलियों को छाती के सामने लाएं और एक बार फिर इसी मुद्रा में बने रहे, आंखें खोलें, हथेलियों को इकट्ठे रखें और हाथों को सिर के ऊपर खींचे, बाजुओं को थोड़ा सा पीछे दबाएं और आंखों को बंद करें, कुछ समय बाद आंखें खोलें, बाजू नीचे लाया और हाथों को घुटनों पर रखें- धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं

लाभ : इस आसन को करने से पीठ, कंधे और पैर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, श्वास गहरी होती हैं शरीर की जागरूकता, संतुलन, एकाग्रता सुधरती हैं और यह आसन नाड़ियों को शांत करता है

6. मयूरासन : इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों पर बैठ जाएं, घुटने कुछ दूरी पर रखें, आगे झुके और हाथों को फर्श पर रखें, उंगलियां पीछे पैरों की ओर हो, पेट को कोहनियों का सहारा दे,छाती को भुजाओं के साथ रखें, टांगों को सीधा कर ले और फर्श से छूटे हुए पंजों से शरीर को सहारा दे, टांगों को ऊपर उठाएं और संतुलन बनाए शरीर के ऊपरी भाग और टांगों को एक सीध में ले जाएं, शरीर का भार और संतुलन केवल हाथों पर रहे, इस स्थिति में कुछ देर रहें और प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं

लाभ : इस आसन को करने से फेफड़ों, लीवर, अग्राशय,किडनी और पेट को मजबूती मिलती हैं, पाचन तंत्र में गैस बनना बंद हो जाता है, डायबिटीज वाले व्यक्ति के लिए यह आसन बहुत ही लाभकारी हैं, यह आसन शरीर का कंपन कम करता है

7. सेतु आसन : इस आसन को करने के लिए टांगें सीधी करके बैठे और हाथों को शरीर के पीछे रखें, हाथों की उंगलियां पीछे की और रहेगी, पूरक करते हुए, शरीर के ऊपरी भाग को ऊपर उठाएं, हाथों पर शरीर का वजन टिक जाएगा, शरीर को पीछे ही आराम से लटकने दे, सामान्य श्वास लेते हुए इस स्थिति में सुविधा से यथासंभव देर तक रहे, श्वास छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में पुनः लौट आएं

लाभ : इस आसन को करने से जकड़ी पीठ को ठीक करने में मदद मिलती हैं, गुरुदेव और थायराइड की कार्य क्षमता को नियमित करता है, इससे शरीर में रक्त का प्रवाह ठीक तरह से होता है, हाई ब्लड प्रेशर में भी यह आसन लाभदायक है

8. सर्वांगासन : इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं, सांस लेते हुए पैर, नितंब और धड़ को ऊपर उठाएं, पीठ को हाथों से सहारा दे और धीरे-धीरे पैरों और पीठ को सीधा करें, थोड़ी छाती को छूना चाहिए, इसी मुद्रा में एक से पांच बने रहे, अब श्वास छोड़ते हुए पैरों को धीरे-धीरे नीचे लाएं, घुटनों को सिर की और लाए और धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं

लाभ : इस आसन को करने से मस्तिष्क में रक्त में ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छे से होता है, शरीर में हैप्पी हार्मोन का स्राव शुरू होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है 

9. अर्धमत्स्येंद्रासन : इस आसन को करने के लिए टांगे सिद्धि रखकर बैठ जाएं, दाएं पैर के तलवों को फर्श पर बाएं घुटने की बाहरी और रखें, बाएं बाजू को दाएं घुटने के बाहर की ओर ले जाएं और दया टखना पकड़ ले, धड़ को यथासंभव दाई और मोड़े, दाया बाजू पीठ के ऊपर रखें और दाएं कंधे के ऊपर से देखें, कुछ मिनट इसी स्थिति में रहे और धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं

लाभ : इस आसन को करने से स्वच्छ एवं सही मात्रा में फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचती है, जननांगों और दिल की बीमारी वाले व्यक्तियों के लिए यह आसन बहुत ही लाभदायक है

10. त्राटकासन : इस आसन को करने के लिए मोमबत्ती जलाकर एक हाथ की दूरी पर रखें, अब आप मोमबत्ती के सामने ध्यान मुद्रा में बैठे,आंखें बंद कर ले और ध्यान पूर्वक जो भी मंत्र आपको आता है उसे मन में दोहराएं, आंखें खोले और बिना पलक झपकाए आप मोमबत्ती की लौ को देखें, लोगों के ऊपरी भाग पर अपनी दृष्टि को एकाग्र करें, आंखों को फिर बंद कर लें और ध्यान करें ( ध्यान में आप ओम मंत्र का भी जाप कर सकते हैं)-नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क और शरीर रहते हैं हमेशा स्वस्थ

लाभ : इस आसन को करने से अंतर्दृष्टि, देखने की क्षमता और स्मरण व इच्छा शक्ति बढ़ती है, आंखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं

आइए साथ ही जानते हैं कि शहर के उच्च अधिकारियों का योग के बारे में क्या कहना है :-नियमित योग करने से मन-मस्तिष्क और शरीर रहते हैं हमेशा स्वस्थ

1. चेतन देवड़ा ( उदयपुर कलेक्टर) : चेतन देवड़ा कहते हैं कि वह रोजाना 1 घंटे योग करते हैं, अनुलोम- विलोम और प्राणायाम उनके पसंदीदा योग हैं, व्यक्ति कितना भी कार्य में व्यस्त रहें उसको स्ट्रेस नहीं होता है, सूर्य नमस्कार, सवान,ताड़ासन जैसे योग करने से शरीर को दुरुस्त रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी भी पुष्ट होती है, इसी से संक्रमण में लड़ने की ताकत मिली है

2. कैलाश चंद्र बिश्नोई ( डीआईजी उदयपुर) : बचपन से ही अनुलोम-विलोम, प्राणायाम, रनिंग और साइकिलिंग जैसी एक्साइज के शौकीन है, मकरासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, ताड़ासन सहित कुल 25 तरह के योगासन से खुद की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, कोरोना की पहली लहर में उदयपुर के पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं

3. राजेंद्र भट्ट ( संभागीय आयुक्त उदयपुर) : बचपन से ही नियमित सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, कपालभाति, सर्पासन, सिंहासन,धनुरासन करते हैं, इससे कोरोना महामारी के नेगेटिव माहौल में भी पॉजिटिव एनर्जी मिलती है, इसी के कारण प्रशासनिक कामकाज शांत मस्तिष्क से करने में बेहद मदद मिलती है

4.अरविंद पोसवाल ( कलेक्टर राजसमंद) : बचपन से ही सूर्य नमस्कार, मकरासन, कपालभाति, ताड़ासन जैसे योग करते आ रहे हैं, अब यही आदत उनके परिवार की भी बन चुकी है, इसलिए कोरोना महामारी के दौरान खुद भी फिट रहें और परिवार भी संक्रमण से लड़ने में कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़ा रहा

5. डॉक्टर लाखन पोसवाल ( प्रिंसिपल आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल) : दिन की शुरुआत अनुलोम- विलोम और प्राणायाम के साथ होती है, महामारी के दौरान भी योग और 3 किलोमीटर रनिंग करते रहे, शीर्षासन पसंदीदा आसन हैं, ताड़ासन, कटिचक्रासन, सेतुबंध आसन, भुजंगासन, त्रिकोणासन, मकरासन आदि तरह के योग भी नियमित रूप से करते हैं

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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