कोटडा में लॉकडाउन का सही उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने खुदा कुआं

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कोटडा/ उदयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : लगातार दूसरे वर्ष भी कोरोना ने हाहाकार मचा रखा है, किसी ने सोचा भी नहीं था कि जीवन में कभी इतना बुरा वक्त भी आएगा, लॉकडाउन में पाबंदियों के चलते सभी लोग घर में बंद होकर अपने दैनिक कार्यों को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं-कोटडा में लॉकडाउन का सही उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने खुदा कुआं

कोटडा में लॉकडाउन का सही उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने खुदा कुआं

ऐसे में आदिवासी क्षेत्र के लोगों ने इस आपदा को अवसर में बदला, किसी परिवार ने 22 फिट कुआं खोद दिया और खुद के साथ ही दूसरे लोगों का भी जल संकट दूर किया, तो किसी ने कुआं गहरा कर पहली फसल ली, कुछ ऐसे ही लोगों की कहानी, हम आज आपको बताने जा रहे हैं ….,  आइए जानते हैं कुछ अच्छा :

लॉकडाउन में श्रमदान का दूसरा उदाहरण मोहल्ला गांव का है, जहां एक परिवार ने जीतोड़ मेहनत कर 4 माह में नया कुआं खोद दिया, इस कुएं में आए पानी से पहली रबी की फसल के रूप में 10 बोरी गेहूं पैदा किया, देवला- कोटडा मार्ग पर स्थित मोहल्ला गांव के कानिया व उसके परिवार के सदस्यों ने लॉकडाउन में यह कुआं खोदा

कानिया लोगों से पहले सुमेरपुर में मजदूरी करता था, पहले लोग डाउन में जब घर लौटा तो मजदूरी छोड़कर गांव में ही खेती करने का विचार आया, यह बात उसने पिता लाडोरा, पुत्र राजू, पत्नी रमी को बताई, सभी ने सहमति जताई इसके बाद कानिया का पूरा परिवार कुआं खोदने में लग गया

सभी के विश्वास और एकजुटता से किए गए संघर्ष कार्य एवं चार महीने की कठोर मेहनत, का नतीजा तेज गर्मी में बिना किसी मशीनरी के 22 फीट ( स्थानीय भाषा में 15 हाथ) गहरा कुआं खोद डाला, मुश्किलें काफी आई, लेकिन सभी अड़े रहे किसी ने हिम्मत नहीं आ रही, आखिर सफलता ने कानिया के कदम चूमे

कुएं में पानी आने व डीजल इंजन से पानी निकालकर पहली फसल लेने से कानिया का पूरा परिवार बहुत खुश है, कुए के पास ही सब्जियां भी हो गई है, कुए को और गहरा कर रहे हैं, लोगों का कहना है कि इस बस्ती में दो हैंडपंप है जरूर पर सालों से बंद पड़े हैं, एक हैंडपंप स्कूल के पास हुआ एक काफी दूर लगा है लेकिन वह सालों से बंद पड़े हैं

कोई में पानी नहीं था, तब सभी लोग करीब 1 किलोमीटर दूर दूसरे कोई से पानी लाते थे, इसके अलावा दूसरा विकल्प नदी के पेटे में भी बना कर वहां से पानी भरकर लाते थे, हम आदिवासी हैं और हम ऐसे जंगलों में निवास करते हैं, हमारी कोई नहीं सुनता, हमारे यहां के जनप्रतिनिधि एवं नेता लोग सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने के लिए हाथ फैला कर एवं हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं, परंतु जब विकास कार्य की बात आती है तो सभी अपना मुंह छुपा लेते हैं

कानिया ने देसी जुगाड़ से किया अपने मिशन को पूरा : कानिया कुआं खोदने के लिए उसके पास मशीनरी, मजदूरी और उपकरण खरीदने का पैसा नहीं था, कानिया देसी जुगाड़ से कुआं खरीदने के लिए लकड़ी का डोला बना लिया, खुदी हुई मिट्टी इसी डोला मशीन से बाहर निकाली

कानिया से दूसरे आदिवासी ले रहे हैं प्रेरणा : आसपास गांव के लोग कानिया के कुए को देखने आते हैं, देसी जुगाड़ की तकनीक ,आस-पास के गांव में भी कानिया से प्रेरणा लेकर लोग कुआं खोदना, कुवैत पक्के करना, कम गहरे कुएं को और क्या करना, नया खेत निकालना, नए घर बनाना आदि काम के लिए प्रेरित हो रहे हैं सीख रहे हैं-कोटडा में लॉकडाउन का सही उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने खुदा कुआं

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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