राजस्थान राज्य में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत ही नाजुक

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हेल्थ रिपोर्ट/ जयपुर/ राजस्थान/ ई समाचार मीडिया/ बेतवा भूमि समाचार/ देवेंद्र कुमार टाक : राजस्थान हेल्थ केयर मैं पढ़ता हुआ नजर आ रहा है, क्योंकि राजस्थान में हर डॉक्टर पर 10 गुना 1 नर्स पर 13 गुना ज्यादा मरीजों का जिम्मा आन पड़ा है, इसका मुख्य कारण है राज्य में 3349 पद खाली पड़े हैं, 5 साल में सिर्फ 468 नए हेल्थ सेंटर खोले गए हैं- कई जगह तो स्थिति जातक है कि किराए के भवन में स्वास्थ्य केंद्र चलाया जा रहा है-राजस्थान राज्य में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत ही नाजुक

राजस्थान राज्य में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत ही नाजुक

राजस्थान सबसे बड़ा प्रदेश है ( यह लगभग 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर) में फैला हुआ है, हर तरह की सब पता लेकिन हेल्थ इंडेक्स में 16 नंबर पर है, इसकी वजह यह है कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार राजस्थान में 10976 की आबादी पर एक डॉक्टर है जबकि प्रति हजार भक्ति पर एक डॉक्टर होना चाहिए, यानी 10 बुनियादी एक डॉक्टर के भरोसे हैं

इसी तरह 3 मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए उसकी जगह पर यहां 40 मरीजों पर एक नर्स है, यानी हर नस पर 13 गुने से ज्यादा बार है, ऊपर से ग्रामीण अस्पतालों में 45% डॉक्टर एवं 50% नर्सिंग कर्मियों की कमी है, डॉक्टरों और नर्सों के कुल मिलाकर 3349 पद अभी तक खाली पड़े हैं, चौंकाने वाली बात यह भी है कि पिछले 5 साल में सिर्फ 468 नए हेल्थ सेंटर खुले हैं, इनमें भी 368 तो अकेले सत्र 2019-20 में खुले थे

राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के चारों उत्तम बहुत ही कमजोर : राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग की पूरी तरह से पोल खुल गई है, भगवान ना करें अगर तीसरी लहर आती है तो राजस्थान की जनता के जीवन की रक्षा ईश्वर भरोसे ही है,आइए कुछ तथ्यों के आधार पर हम आप को समझाते हैं कि राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग अन्य राज्यों के बनिस्पत कितना कमजोर है :

1.स्वास्थ्य भवन : राजस्थान में 1227 अस्पताल अभी भी किराए के भवनों में चल रहे हैं – 2005 में 10512 सब सेंटर, पीएचसी 1713, सीएचसी 326  थे,  2010 में यह बढ़कर 13480 सब सेंटर, 2094 पीएचसी, और 548 सीएससी हुए , 2020 में कुल 13480 सब सेंटर में 10621 सरकारी भवन में चल रहे हैं, 

यानी 1204  सेंटर अभी भी किराए व 1655 पंचायत दोनों में चल रहे हैं, 2094 पीएचसी में से 1963 सरकारी भवनों में तथा 21 किराए पर एवं 110 सेंटर पंचायत भवनों में है , राजस्थान की 548 सीएचसी में से 530 सरकारी भवनों में वह तो किराए की जगह पर वह सोला पंचायती घरों में संचालित हो रही है 

2.स्वास्थ्य विभाग का मेन पावर : ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों पद अभी भी खाली पड़े हैं –  2020 में ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एएनएम की 17941 पोस्ट है इनमें से 14917 कार्यरत है एवं 3024 पद खाली पड़े हुए हैं,  पीएससी में 2170 डॉक्टरों के पद स्वीकृत किए गए हैं, परंतु अभी 1845 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, यहां 325 पद अभी भी खाली है

पीएचसी व सीएचसी पर कुल 10410 नर्सिंग स्टाफ के पद स्वीकृत हैं, परंतु यहां 8174 पद कार्यरत है तब 2236 पद अभी भी खाली है,  ग्रामीण क्षेत्रों के सब सेंटरों पर  कुल 134480 पुरुष हेल्थ वर्कर की जरूरत है, परंतु सिर्फ 559 के पद स्वीकृत हैं  इसमें से भी 327 पद ही कार्यरत हैं, 232 पद अभी भी रिक्त हैं, पुरुष हेल्थ वर्कर की  13153 की कमी अभी भी है

2094 पीएससी पर 870 आयुष चिकित्सकों के पद हैं, इन पर 570 कार्य थे और 300 अभी भी खाली पड़े हैं,  सीएससी पर 548 आयुष विशेषज्ञों की जरूरत है लेकिन छत्रपति स्वीकृत हैं,  इनमें 51 ही कार्यरत हैं और 25 पद अभी भी खाली पड़े हैं, 497 किसी की कमी है,  सीएससी पर 548 रन चाहिए परंतु सरकार ने 4 पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन इनमें से भी 101 सर्जन ही कार्यरत हैं, यहां पर भी 300 पद खाली पड़े हैं और 447 की कमी है 

ग्रामीण क्षेत्रों सीएचसी में 548 प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ चाहिए, परंतु सरकार द्वारा 265 पद ही स्वीकृत किए गए हैं,  इनमें से b-101 कार्यरत हैं और 164 पद खाली पड़े हैं तो 447 कर्मियों की कमी है, ग्रामीण क्षेत्रों के सीएससी में 548 चिकित्सक की जरूरत है,  सरकार द्वारा यहां पर 400 पद ही स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 129 पदों पर ही कार्यरत हैं,  यहां पर भी 276 पद अभी भी खाली पड़े हैं तो 419 पदों की कमी है परंतु सरकार के आंखों पर पट्टी बंधी हुई है

3 .स्वस्थ्य विशेषज्ञ : 2192 पद की जरुरत है परन्तु सरकार द्वारा 1376 पद ही मंजूर है, – सीएचसी पर सर्जन , ओबी व जिवाई, चिकित्सक व बाल रोग 2192 विशेषज्ञों की जरुरत है लेकिन सरकार से 1376 पद ही स्वीकृत है , परन्तु कार्यरत सिर्फ 438 विशेषज्ञ ही है, यानि 1754 की कमी बानी हुई है, सीएचसी पर रेडियोग्राफर के 664 पद स्वीकृत है है परन्तु कार्यरत सिर्फ 329 है यानि 335 कहली पड़े है – इससे यह प्रमाणित होता है की राज्य में स्वस्थ्य व्यवस्था पर सरकार पूरी तरफ नाकाम हो चुकी है 

4 .पैथोलॉजी : पैथोलॉजी में 950 लैब टेक्नीशियन के पद खाली – पीएचसी व सीएचसी पर 2929 लैब टेक्निशन के पद स्वीकृत है , 1979 कार्यरत है, 950 पद खाली है, पीएचसी व सीएचसी पर 2642 फार्मासिस्ट की सख्त जरुरत है, परन्तु सरकार द्वारा सिर्फ 1110 ही कार्यरत है , यहाँ पर भी 1532 की कमी है 

राज्य के 68 % हेल्थ सेंटरों के भरोसे 100% जनता (ईश्वर ही मालिक

राज्य में कुल उपस्वास्थ केंद्र (सब सेंटर ) – की जरुरत है – 21682 है परन्तु वर्तमान में सिर्फ 14497 पद ही है कार्यरत है ,अभी भी 7185  कमी है

राज्य में कुल प्राथमिक स्वास्थ केंद्र (पीएचसी) – की जरुरत है – 2548  है परन्तु वर्तमान में सिर्फ 2147 पद ही है कार्यरत है ,अभी भी 401 

कमी है

राज्य में कुल सामुदायिक स्वास्थ केंद्र (सीएचसी) – की जरुरत है – 1104 है परन्तु वर्तमान में सिर्फ 655 पद ही है कार्यरत है ,अभी भी 449 कमी है

राज्य में 5 वर्ष में 96 ही सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र बढे, कोरोना संकट के बावजूद पिछले साल सिर्फ 7 नए हेल्थ सेंटर बने है-राजस्थान राज्य में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति बहुत ही नाजुक

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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