जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर पाक ड्रोन ने गिराए आईडी बम

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सुरक्षा एजेंसी/ श्रीनगर/ नई दिल्ली/ भारत/ ई समाचार मीडिया/ बेतवा भूमि समाचार/ देवेंद्र कुमार टाक : पाकिस्तान से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर भारतीय वायुसेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार- रविवार की दरमियानी रात दो बम धमाके हुए इन धमाकों में 2 जवान मामूली रूप से घायल हुए हैं-जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर पाक ड्रोन ने गिराए आईडी बम

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर पाक ड्रोन ने गिराए आईडी बम

तथा टेक्निकल एरिया में बने एक भवन की छत को नुकसान पहुंचा है, यह धमाके भले ही कम तीव्रता के थे, मगर सबसे खास बात यह थी कि पहली बार हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है, ड्रोन के जरिए एयरफोर्स के भीतर दो आईडी बम गिराए गए, एक आईडी बम भवन की छत पर गिरा, जबकि दूसरा आईडी बम खुले स्थान में गिरा

पहला धमाका रविवार तड़के 1.37 बजे और दूसरा धमाका 1.43 बजे हुआ, जांच एजेंसियों को आशंका है कि हमले का निशाना एयरफोर्स स्टेशन पर खड़े वायुसेना के एयरक्राफ्ट थे,धमाके इन से कुछ ही दूरी पर हुए हैं मगर किसी मशीनरी को नुकसान नहीं पहुंचा है, यह एयरवेज वायु सेना द्वारा संचालित सिविल एयरपोर्ट है, घटना के बावजूद यहां उड़ानों का संचालन सामान्य है

जम्मू- कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इसे एक आतंकी हमला बताया है, हालांकि जांच एजेंसी या पाकिस्तान के एंगल से भी जांच कर रही हैं, मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, माना जा रहा है कि जांच एनआईए अपने हाथ में ले सकती हैं, घटना के कुछ देर बाद पुलिस ने जम्मू में लश्कर-ए- तैयबा  से जुड़े एक आतंकवादी को गिरफ्तार भी किया है

बनिहाल के इस व्यक्ति से 5-6 किलो विस्फोटक भी मिला है, एयरपोर्ट पर हमला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लद्दाख दौरे से कुछ ही घंटे पहले हुआ है, इसके बावजूद वे रविवार को लद्दाख पहुंचे, उन्होंने घटना पर वॉइस हेयर चीफ एयर मार्शल एस एस अरोड़ा से भी बात की है

ड्रोन इतना घातक की 100 किमी. तक इसकी रेंज एवं रडार में भी नहीं पकड़ा गया : आतंकी हमले में ड्रोन का इस्तेमाल बहुत ही चिंताजनक हैं, ड्रोन के मामले में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि छोटा और नीची उड़ान भरने के कारण रडार की पकड़ में नहीं आता है,बहुत पास आने पर इसे देखा जा सकता है यही कारण है कि ड्रोन के मामले में “ शूट टू किल” का एसओपी अपनाया जाता है

इसके लिए अमेरिका और इजराइल मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं, हम भी ड्रोन के हमले रोकने में पूरी तरह सक्षम है ड्रोन की रेंज 5 से लेकर 100 किमी तक हो सकती है यह ड्रोन के पेलोड पर निर्भर है ड्रोन के टुकड़ों से 24 घंटे में पता चल जाएगा कि यह कितनी रेंज का था और कहां से उड़ान भरी होगी

जांच एजेंसियां का अनुमान ड्रोन हमले में पाकिस्तान की भूमिका संभव : जनरल वीपी मलिक ( पूर्व सेना प्रमुख) के अनुसार  जम्मू एयर फोर्स स्टेशन सीमावर्ती क्षेत्र में है और घटना में बेशक पाकिस्तान का हाथ हो सकता है, लेकिन हम इस घटना को कश्मीर पर प्रधानमंत्री की पहल से जोड़कर नहीं देख पा रहे हैं, आतंकी हमलों की साजिश बहुत पहले से चल रही होती है

एयर फोर्स स्टेशन को निशाना बनाने के लिए वक्त चाहिए, दूसरे कश्मीर में सक्रिय उग्रवादी गुटों की इतनी  हिमाकत नहीं है कि इस तरह के हमले के बारे में सोच भी सके, कश्मीर पर ताजा पहल हमारा अंदरूनी मामला है पाकिस्तान और वहां सक्रिय आतंकवादी गुट भारत में विघ्न डालने से बाज नहीं आएंगे इसका अंदाजा सुरक्षा तंत्र को है- और उसे ना काम करने के लिए हमारा सुरक्षा तंत्र हाई अलर्ट पर है

सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी है कि हमले के बाद ड्रोन किस तरह गए : मौके पर वायुसेना, राष्ट्रीय बम डाटा सेंटर, स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स व एनआईए की टीम मौजूद है, अधिकारी इस बात की जांच में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं कि ड्रोन किधर से आए थे और हमला करके किस तरफ गए हैं, जांचकर्ताओं ने कहा- सीसीटीवी सड़कों पर नजर रखते हैं

स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन सीमा पार गए या कहीं और, अधिकारियों ने कहा कि एयरपोर्ट का रडार डॉन को पकड़ने में सक्षम नहीं है, इसके लिए असरदार की जरूरत है जो चिड़िया को भी देख कर अपने राडार में खींच कर सके -जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर पाक ड्रोन ने गिराए आईडी बम

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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