कोरोना का डेल्टा वेरिएंट से आंखों की रोशनी जाने व लकवा होने का खतरा

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हेल्थ रिपोर्ट/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : प्रदेश में कोरोना संक्रमण ढलान पर हैं, यानी धीरे-धीरे प्रदेश में कोरोना के आंकड़ों में सुधार हो रहा है, कोरोना के मरीज घट रहे हैं, इसी के चलते राज्य में लॉकडाउन में काफी छुट्टी दे दी गई है और लोगों में भी धीरे-धीरे व्यापार, नौकरी, काम धंधे करने के लिए हिम्मत जगी है-कोरोना का डेल्टा वेरिएंट से आंखों की रोशनी जाने व लकवा होने का खतरा

कोरोना का डेल्टा वेरिएंट से आंखों की रोशनी जाने व लकवा होने का खतरा

इसी बीच जयपुर के s.m.s. अस्पताल में चौंकाने वाले मामले सामने आए यहां भर्ती 15 मरीजों को आंख में दर्द, सूजन, पानी आना, एक ही चीज दो दो दिखाई देना जैसे लक्षण थे, लेकिन जांच के दौरान में ब्लैक फंगस नहीं मिला- चिकित्सक भी हैरान है कि आखिर यह क्या बीमारी है जिससे यह लक्षण हो रहे हैं 

जबकि मरीजों में ब्लैक फंगस नहीं मिला फिर भी मरीजों को आँखों की रौशनी से हाँथ धोना पड़ा, इसी तरह से दिमाग में खून की सप्लाई कम  होने की वजह से 40 मरीज पैरालिसिस या स्ट्रोक का शिकार हो गए , जब वैज्ञानिको को ने गहनता से शोध किया तो पाया की इसके पीछे ब्लैक फंगस तो था ही परन्तु कोरोना का नया वेरिएंट डेल्टा है, जो भी बहुत खतरनाक है इसी वेरिएंट ने पुरे भारत में तबाही मच्चाइ है 

ऐसे मामलो को देखकर कर डॉक्टर भी हैरान है डॉक्टरों का कहना है की डेल्टा वेरिएंट तो इसकी वजह है ही इसके अलावा ये भी माना जा रहा है की मस्तिष्क में खून का प्रवाह कम होने की वजह से इंसान के नाक व साइनस में फंगस हो रहा है, अब एसएमएस इसका अध्ययन करने जा रहा है, ताकि इस बीमारी की सही वजह पता चल सके 

एक्सपर्ट का कहना : एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी के अनुसार कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन डेल्टा वेरिएंट की वजह से खून में थक्के जम सकते है इसकी वजह से आपकी दमणी में खून का प्रवाह बंद होने की वजह से दिखाई देना बंद हो सकता है, दिमाग में खून की आपूर्ति कम होने से पैरालिसिस या स्ट्रोक हो सकता है जिनकी आंखों की रोशनी गई है ऐसे मरीज के लिए अच्छी बात यह है कि उन्हें बचाने में कामयाब हो गए

एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड सेठ ठीक होने वाले मरीजों को लंबे समय तक खून को पतला करने की दवा देनी चाहिए : एस एम एस के म्यूकर माइकोसिस बोर्ड के कन्वीनर डॉ मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि आँख व दिमाग में पंकज नहीं था फिर भी दिखाई दें देना कम हो गया / बंद हो गया , कुछ मरीज पैरालिसिस के भी शिकार हो गए , ऐसे में मरीजों को कोवीड से ठीक होने के तुरंत बाद लम्बे समय तक खून को पतला करने वाली दवा देनी चाहिए -कोरोना का डेल्टा वेरिएंट से आंखों की रोशनी जाने व लकवा होने का खतरा

एक्सपर्ट की सलाह : जिस किसी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण हुआ है और संक्रमण के दौरान या उसके ठीक होने के बाद अगर आंख में दर्द, सूजन, आंख मे पानी आना, या आंख का लाल होना या फिर लगातार सिर दर्द रहना अगर किसी भी मरीज को इसी समस्या है तो उसे नजरअंदाज नहीं करें और तुरंत चिकित्सक की सलाह लें अनु के परामर्श के अनुसार दवाई लें, क्योंकि कोरोना से ठीक होने के बाद फंगल इंफेक्शन पहले साइनस फिर  आंखों और दिमाग में  पहुंचता है

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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