देश की महिला शक्ति सबसे आगे

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उदयपुर / भारत : देश की महिला शक्ति सबसे आगे-पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आयरन लेडी के खिताब से नवाजा गया था, उन्होंने यह साबित कर दिखाया था कि महिलाएं सिर्फ घर के कामों तक ही सीमित नहीं है, वह नेतृत्व करने में आगे हैं और देश भी चला सकती हैं वह ऐसी सशक्त महिला थी जिनके बुलंद हौसलों के आगे पूरी दुनिया ने घुटने टेक दिए थे

देश की महिला शक्ति सबसे आगे

उनकी इसी सशक्त छवि ने भारत में महिलाओं को अपने पसंदीदा क्षेत्रों में कुछ कर गुजरने और आगे बढ़ कर इतिहास बनाने के लिए प्रेरित किया यही कारण है कि राष्ट्रीय बालिका दिवस के लिए 24 जनवरी का दिन चुना गया, इसी दिन इंदिरा गांधी ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी

आज राष्ट्रीय बालिका दिवस पर ई समाचार डिजिटल मीडिया बेटियों की सफलताओं की कुछ ऐसी ही कहानियां आप तक पहुंचा रहे हैं जो लड़की होने के दाने पड़ने पर भी नहीं रुके और अपनी मंजिल पाकर अपना सपना साकार तो किया परंतु साथ ही देश की अन्य महिलाओं बहनों के लिए एक प्रेरणा की स्त्रोत बनी

आइए कुछ जानते हैं इन महिला शक्ति के बारे में जिन्होंने दिनरात मेहनत करके अपना मुकाम पाया :

1.डॉ मंजू (आईएएस) : जिला परिषद के सीईओ आईएएस डॉ मंजू का कहना है कि जब वह बतौर स्त्री रोग  विशेषज्ञ काम कर रही थी, तब उन्हें कई बार मरीज अहसास करवाते थे कि वह महिला हैं अच्छा काम कर पाएगी या नहीं, उस समय बहुत बुरा लगता था आईएएस बनने के बाद भी कई बार लोगों से बातचीत में लगता है कि वह पुरुष के मुकाबले महिलाओं को कम आते हैं

देश की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

जैसे कई बार कार्मिक कहते हैं कि वह महिला हैं कैसे यह काम कर पाएगी, परंतु डॉ मंजू ने दिन रात मेहनत की और अपना सपना साकार करते हुए ऐसी सोच रखने वाले मानवीय के मुंह पर हमेशा हमेशा के लिए ताला जड़ दिया, मूलतः

झुंझुनू जिले के अलसीसर निवासी डॉ मंजू के पिता श्रवण कुमार, माता सावित्री देवी है, परिवार में उन्हें खूब सपोर्ट मिला उनकी एक बहन व भाई हैं बड़े भाई डॉक्टर अनिल, उत्तर प्रदेश कैडर में आईपीएस हैं-देश की महिला शक्ति सबसे आगे

2. चेतना भाटी (डीवायएसपी) : उदयपुर में बतौर डीवाईएसपी सेवारत जैसलमेर में पली-बढ़ी चेतना पार्टी बताती है कि उनके जन्म पर लोग ताने मारते थे ताने सुन परिवार के लोग परेशान होते थे, लेकिन परिवार को दूसरी बेटी जन्म का दुख नहीं था उस दरमियान गांव में बेटियों को पढ़ाने का चलन भी नहीं था, चेतना ने परिवार और गांव के विरुद्ध जाकर उच्च शिक्षा हासिल की

देश की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

संगीत के शौक ने कई पुरस्कार दिलाएं, बास्केटबॉल की नेशनल प्लेयर रही टीवी पर किरण बेदी को देखा तो पुलिस में जाने की ठान ली, वह पुलिस में उच्च पद पर हैं, 90 के दशक में उनकी लिखी कविता से देश को बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के नारे पर केंद्र से सम्मान मिला,

गांव के लोगों को समाज के लोगों के द्वारा इतने ताने सुनने के बाद भी चेतना पार्टी ने रोकी नजुकी दिन रात मेहनत की और अपने मुकाम को पाया और अपना सपना साकार किया और उन ना-गवार लोगों को दिखला दिया की महिला शक्ति आज के युग में किसी से कम नहीं है

3. डॉ मधुबाला चौहान (उदयपुर जनाना सरकारी हॉस्पिटल की अधीक्षक) : पन्नाधाय जनाना हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ मधुबाला चौहान ने आरएनटी से 1977 में एमबीबीएस और 1984 में एम एस  पास किया पिता बीआर चौहान वह माता कमलादेवी है, डॉ मधुबाला मूलतः नीमच और बाद में भीलवाड़ा निवासी चौहान तीन बहनें और एक भाई है

देश की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

उन्होंने बताया कि परिवार से लेकर पढ़ाई और काम के दौरान हर बार यह जताया जाता था कि वह लड़की है, कमजोर हैं, परिवार में लड़कों को जेब खर्च मिलता था परंतु लड़कियों को नहीं मिल पाता था इसके लिए उन्होंने लड़ाइयां लड़ी

बाद में उन्हें भी वह चीजें दी जाने लगी, पिता की लाडली होने से उन्हें खूब प्यार मिला उनके दो बेटे हैं, जो दोनों ही चिकित्सक हैं, एक बेटी की ही कमी थी जो अब पोती के आने पर पूरी हो गई है 

न्यूज :- देवेंद्र  कुमार  टांक

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