मेहनत की कमाई भ्रष्ट अफसरों को ट्रैप करने में गवाई

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मेहनत की कमाई भ्रष्ट अफसरों को ट्रैप करने में गवाई

क्राइम रिपोर्टर/ उदयपुर/ जयपुर :  मेहनत की कमाई भ्रष्ट अफसरों को ट्रैप करने में गवाई – भ्रष्टाचार मिटाने में सहयोग देने वाले परिवारों की पीड़ा-  भ्रष्ट अफसरों को ट्रैप करने के लिए दी थी मेहनत की कमाई,  बरसों बीत गए फिर भी अभी तक नहीं मिली

खुद की प्रॉपर्टी ट्रांसफर करवाने या छोटे-छोटे कामों की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले अफसरों को हम ट्रैक तो करवा देते हैं, लेकिन हमारी मेहनत की कमाई फिर भी नहीं बस्ती एसीबी ट्रैप के लिए हम से ही रुपए लेती हैं और एविडेंस के रूप में वह रुपए  जब्ती भी उसी रकम की दिखाती है

यह रुपए हमें वर्षों तक वापस नहीं मिलते हैं 10-15  साल बाद निचली अदालत से वापस करने के आदेश हो भी जाते हैं तो मामला हाईकोर्ट में पहुंच जाता है क्या रिश्वतखोर अफसर को पकड़वाने के बाद हमें अपना पैसा वापस नहीं मिल सकता ??? यह सवाल उन परिवारों के हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( ऐसीबी) से शिकायत कर कई अफसरों और कर्मचारियों को ट्रैप करवाया उन्होंने अपनी यह पीड़ा एंटी करप्शन डे पर हुई ऑनलाइन बैठक में ऐसीबी अफसरों को बताई है

उदयपुर के लम- सम 600 लोगों को 10-15  साल से है माल खाने में बंद रुपए मिलने का इंतजार :  एंटी करप्शन डे पर हमने जब  ई समाचार डिजिटल मीडिया के एडिटर एंड डायरेक्टर  देवेंद्र कुमार टाक  जब जनता से रूबरू हुए  तब ऐसे ही 2 मामले हमारे सामने आए हैं,  आइए जानते हैं यह क्या है मामले – मेहनत की कमाई भ्रष्ट अफसरों को ट्रैप करने में गवाई

(1) 2008 में ₹25000 जब हुए 12 साल बाद भी नहीं मिले :  बांसवाड़ा एसीबी ने 8 अगस्त 2008 को जिला खेल अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक वीरेंद्र कुमार को 5000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था परिवादी ने 7 अगस्त 2008 को शिकायत की थी कि पत्नी की बतौर अंशकालीन शारीरिक शिक्षक नियुक्ति के लिए 25000 मांग रहे हैं

मामले में 4 मार्च 2020 को फैसला हुआ वीरेंद्र को 1 साल की कैद सुनाई गई कोर्ट से अपील मियाद गुजरने के बाद ट्रैप राशि परिवार को लौटाने के आदेश भी हुए इस बीच मामले में ऊपरी कोर्ट में अपील हो गई और राशि  अभी तक नहीं मिली

(2) पिछले हफ्ते जमादार को पकड़वाया , राशि जब्त : एसीबी प्रतापगढ़ ने 5 दिसंबर 2020 को जमादार रितेश को ₹2500 लेते गिरफ्तार किया था शिकायत सफाई कर्मी कविता के पति अरुण ने की थी काम पर नहीं आने पर गैर हाजिरी नहीं डालने के बदले रुपए मांगे जा रहे हैं, एसीबी ने राशि जप्त कर परिवादी को बताया कि अब जब तक कोर्ट से फैसला नहीं आता राशि कोर्ट माल खाने में रहेगी-

ब्याज पर लाते हैं रुपए :  अमूमन परियों के पास रिश्वत देने की राशि नहीं होती हैं वह ब्याज पर लेकर आते हैं और भ्रष्ट अधिकारी कोर्ट रेप कराते हैं ऐसे में वह ब्याज पर लिए रुपए लौटाने के लिए10-15  साल तक इंतजार नहीं कर सकते हैं,  क्योंकि ब्याज पर लाई हुई राशि  का मूल के साथ-साथ ब्याज भी अदा करना होता है

यह जनता के लिए बहुत बड़ी दुखदाई बात है,  इस पर लोगों का रिएक्शन यारा की सरकार को जल सेजल एक ऐसा अधिवेशन लाना चाहिए जिसमें रुकी हुई राशि लोगों को  1 सप्ताह, 15 दिन  या  कम ज्यादा ज्यादा 1 माह के अंदर अंदर मिल सके

ई समाचार डिजिटल मीडिया ने प्रशासनिक और लीगल एक्सपर्ट से जाना कैसे मिल सकती हैं परिवारों को राहत : 

दिलीप सिंह चुंडावत,  सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसीबी) :  सरकार परिवादी को रुपए लौटा सकती हैं –  एसीबी चौकियों को पहले से फंड जारी किया जाता है तो  वह लीगल समस्या होगी और एसीबी भी पार्टी बन जाएगी,  आखिरकार होना यह चाहिए कि ट्रैप कार्रवाई के बाद सरकार की तरफ से परिवादी को राशि लौटाई जाए और जब तक राशि कोर्ट का आदेश होने पर सरकार के खाते में आ जाए इससे परिवारों को राहत मिलेगी 

यह संभव इसलिए :  फंड राज्य सरकार जारी कर सकती है गत दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ऐसी भी की हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह बात प्रमुखता से उठाई थी सीएम का रिस्पांस बी पॉजिटिव था

गणेश शंकर तिवारी,  वरिष्ठ सहायक निदेशक अभियोजन,  (एसीबी कोर्ट) :  नोटों की कलर फोटो कॉपी को बना सकते हैं साक्ष :   चालान पेश होने के बाद जप्त राशि माल खाने में जमा हो जाती हैं ट्रायल के दौरान ट्रैप नोट एविडेंस तो होता है,  लेकिन नोट के नंबर सबसे जरूरी होते हैं ऐसे में रेप जप्त नोटों की रंगीन फोटो कॉपी करवा कर फर्ज बने और यही फोटो कॉपी एविडेंस के रूप में काम आ जाए चालान पेश होने के बाद राशि परिवादी को लौटाई जाए इसमें सरकार को जरूर कदम उठाना चाहिए

यह संभव इसलिए हैं –  नोटबंदी के समय 500-1000  के नोट चलन से बाहर हो गए थे तब एसीबी ने जप्त नोटों की रंगीन फोटो कॉपी करवाई और साक्ष्य के रूप में काम में लिए असल नोट बैंक में जमा करा दिए गए थे

न्यूज :- देवेंद्र कुमार टांक

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