प्रशासन गांवों के संग अभियानगींगला शिविर में पहुंचे कलक्टर

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उदयपुर, 18 मई। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में जारी प्रशासन गांवों के संग अभियान में राहत के विभिन्न आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। जिला कलक्टर ताराचंद मीणा लगातार शिविरों का निरीक्षण करते हुए प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। जिला कलक्टर के निर्देशन में विभिन्न विभागों द्वारा एक ही छत के नीचे सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में जिला कलक्टर मीणा बुधवार को अभियान के तहत सलूंबर उपखण्ड की गींगला ग्राम पंचायत में आयोजित शिविर में पहुंचें-प्रशासन गांवों के संग अभियानगींगला शिविर में पहुंचे कलक्टर

प्रशासन गांवों के संग अभियानगींगला शिविर में पहुंचे कलक्टर

उन्होंने शिविर में लगी विभिन्न विभागों की स्टॉल्स का निरीक्षण किया और विभागों द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से 5 दिव्यांग आशार्थियों को आस्था कार्ड वितरित किये। कलक्टर ने सभी विभागों को निर्देश दिये कि सरकार की मंशा के अनुरूप शिविर में आने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या का त्वरित निस्तारण करें और सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए अधिक से अधिक लोगों को इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करें।


ग्रामीणों से किया संवाद:
इस अवसर पर जिला कलक्टर ने शिविर स्थल पर मौजूद ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि सरकार ने आपके हित को ध्यान में रखते हुए एक ही छत के नीचे विभिन्न सुविधाएं, योजनाओं का लाभ व आपसी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए यह अभियान चलाया है। सभी ग्रामवासी जागरूक होकर इन शविरों का पूरा-पूरा लाभ उठाएं। ग्रामीणों ने कलक्टर के समक्ष अपनी समस्याएं भी रखी, जिस पर कलक्टर ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को शीघ्र राहत प्रदान करने के निर्देश दिए।

जीवदया की अनूठी मिसाल बनी उदयपुर की डॉ. माला मट्ठा -सैकड़ों मासूम जीवों की बचा चुकी हैं जान
अब चला रही परिंडे एवं गौरैया के नन्हें घर लगाने की मुहिम

उदयपुर, 18 मई। “हम बोल नहीं सकते, फिर भी जज्बात रखते है, जिसे कह दिया अपना, उसे हर दम साथ रखते हैं…” बेजुबानों की खासियत है कि एक बार वे जिसे अपना मान लें, उसकी वफादारी वे हमेशा करते हैं। चाहे फिर इंसान उनकी तौहीन ही क्यों न करे… लेकिन फिर भी आज के आपाधापी के जमाने में बेजुबानों की परवाह करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। इसी बीच जीव दया एवं संरक्षण के लिए अपना सब कुछ लगा देने वाली उदयपुर डॉ.माला मट्ठा की कहानी अपने आप में एक मिसाल है।


उदयपुर की डॉ माला मट्ठा जानवरो की सेवा मे पिछले 12 सालों से कार्यरत है। विभिन्न दुर्घटनाओं व अन्य कारणों में घायल और लोगों द्वारा मारे-पीटे जाने से पीडि़त सैंकड़ों गायों, श्वानों एवं अन्य जीव-जंतुओं की जान बचा चुकी हैं। माला मट्ठा अपनी संस्था के सदस्यों के साथ उदयपुर शहर की सौ किलोमीटर परिधि में किसी भी मासूम जानवर की दुर्घटना या बीमारी जैसे मामलों में तुरंत पहुँच कर उनकी सहायता एवं उपचार कर रही हैं. यही नहीं, उपचार के उपरान्त ठीक होने पर उस जीव को पुनः उसके गाँव या क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया जाता है। जीवदया के लिए इनका जज्ब़ा तो इस कदर है कि लोग यदि किसी जीव को पीटते हैं तो उन्हें यह सहन नहीं होता और अब तक उन्होंने खुद आगे आकर इन जानवरों को बचाया है।


जीवदया माला कर रही कई सारे जतन:
डॉ.मट्ठा द्वारा ने हाईवे पर रह रहे जीवांे को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए रेडियम कॉलर पहनाने की मुहिम चला रखी है तो गर्मियों में बेजुबानों के दाना-पानी की व्यवस्था का भी पूरा-पूरा ध्यान रखा है। भीषण गर्मी में वे पक्षियों के पानी के लिए परिंडें और अन्य जानवरों के लिए पानी की छोटी-छोटी टंकिया भी लगा रही है। डॉ. मट्ठा बताती हैं कि इन्होंने इस वर्ष उदयपुर शहर के कई क्षेत्रों में गायों एवं श्वानों के लिए लगभग 200 से अधिक बड़ी पानी की टंकियां, पक्षियों के लिए 1000 से अधिक लटकाने एवं रखने वाले परिण्डें लगवाएं एवं वितरित किए हैं ताकि बेजुबान जानवरों एवं पक्षियों को भीषण गर्मी में पीने का साफ पानी और रहने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके।


गोरैया के लिए बना रही रंग-बिरंगा आशियाना:
इन दिनों क्षेत्र में पक्के मकानों के बनने और मोबाइल रेडियेशन के कारण कम हो रही गोरैया की आबादी को ध्यान में रखते हुए डॉ. मट्ठा ने खुद अपने हाथों से 100 से ज्यादा कृत्रिम घौंसलें तैयार किए है और लोगों को निःशुल्क वितरित किए हैं। इसके लिए वे बाजार से गोल गुल्लक खरीद कर उसमें चिडि़या के प्रवेश के लिए छेद बनाती है और फिर इस पर आकर्षक रंग कर लटकाने के लिए तार आदि लगा कर लोगों को बांट रही है ताकि हमारे घर-आंगन की शान गोरैया चिडि़या को उसका आशियाना मिले-प्रशासन गांवों के संग अभियानगींगला शिविर में पहुंचे कलक्टर


बेजुबानों के लिए छोड़ी नौकरी और न की शादी:
डॉ. मट्ठा बताती हैं कि कभी वह एक निजी अस्पताल में नौकरी करती थी परंतु उस पेशे में इन बेजुबानों के लिए समय नहीं निकाल पाती थी इसलिए उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। इसी प्रकार शादी न करने का फैसला भी महज इसलिए लिया ताकि उनके भावी परिवार को इनके बेजुबानों के प्रति प्रेम से कोई परेशानी पैदा न हो। वह बताती है कि इन बेजुबानों के साथ प्यार बांटकर वो अपने पेशे और परिवार से भी ज्यादा संतुष्टि पा रही है और अब तो यही उसके जीवन का मकसद भी बन चुका है।

 
एनिमल वेलफेयर ऑफिसर नियुक्त हुई माला:
डॉ. मट्ठा की जीवों के प्रति की जाने वाली सेवा को देखते हुए एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया से  इन्हें उदयपुर के लिए ऑनरेरी एनिमल वेलफेयर ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है, जिससे इनके कार्यों को और प्रोत्साहन मिला है। डॉ माला मिसाल है उन लोगों के लिए जो बेवजह मासूम जानवरों को प्रताडि़त करते हैं या उनकी उपेक्षा करते हैं।


सहकारिता से होता जीवदया का काम:
डॉ. मट्ठा बताती है कि जीवदया का काम अकेले के बस की बात नहीं। इसके लिए उनके साथ कई सारे साथी जुड़े हुए हैं। एनिमल प्रोटेक्शन सोसायटी के बैनर तले डॉ. मट्ठा के साथ विशाल होलोरिया, मनीष पंचाल, नरेश जणवा, शुभम बड़ाला, गुड्डी पटेल, सीतारामजी के साथ लव शर्मा, कोमल, रवि और दीपांकर सहयोग करते हैं।


माला की मासूम अपील:
डॉ. मट्ठा यह भी बताती हैं कि चिलचिलाती गर्मी में भूख और प्यास के साथ सड़क पर रहने वाले जीवो में सन स्ट्रोक भी होता है जिससे कई जीव-जंतु मारे जाते हैं। ऐसे में सभी का कर्तव्य है कि अपने आस-पास रहने वाले उन मासूम बेजुबानों की रक्षा के लिए भी कदम उठाएं। जो अपनी पीड़ा हमसे कह नहीं सकते, उनके बारे में जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को बताएं ताकि उनका जीवन बचाया जा सके।

बाल संरक्षण को लिए बनेगी टास्क फोर्स
उदयपुर, 18 मई। एक्शन प्लान मई 2022 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बालश्रम, बाल विवाह रोको अभियान, बंधुआ मजदूरी रोकने के लिये लिए टॉस्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष के निर्देशन में मई 2022 के एक्शन प्लान के तहत चलाए जा रहे अभियान बिल्डिंग द नेशन ब्रिक्स बाय ब्रिक्स के तहत उदयपुर जिले में बालश्रम रोकने, बाल विवाह रोको, बंधुआ मजदूरी रोकने, कारखाना अधिनियम, आदि विषयो पर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए।

इस कार्य का संपादन किये जाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर द्वारा टॉस्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस टॉस्क फोर्स में श्रम विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष/सदस्य, मानव तस्करी यूनिट के प्रभारी, संबधित तहसील के एसडीएम, संबधित थाने के एसएचओ को सम्मिलित किया जाएगा। यह टॉस्क फोर्स उदयपुर जिले में बालश्रम मुक्ति अभियान, बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाना एवं उनका पुनर्वास, बाल विवाह रोकने संबधित कार्य के साथ आमजन में जागरूकता अभियान चलाने का कार्य करेगी।

बालश्रम एवं बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाए गए श्रमिकों को पीड़ित प्रतिकर स्कीम एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। बैठक में बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत ध्रुव कुमार कविया ने बताया कि विधि की सुरक्षा एवं आवश्यकता वाले बालकों हेतु जिला उदयपुर में पर्याप्त संख्या में बाल गृह संचालित है, जिनमें रेस्क्यु किये गए बालक-बालिकाओं को रखने की व्यवस्था है। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय भी लिया गया कि जो माता-पिता एवं सरक्षक बालक-बालिकाओं को बाल श्रम हेतु भेजते है उनके विरूद्ध एफ.आई. आर. दर्ज करवाई जाकर कार्यवाही की जानी चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संयुक्त श्रम आयुक्त पी.पी. शर्मा, बाल कल्याण समिति सदस्य के सुरेश चन्द्र, सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

जिला स्तरीय जनसुनवाई आज
उदयपुर, 18 मई। जिला स्तरीय जनसुनवाई 19 मई की सुबह 11 बजे जिला कलक्टर ताराचंद मीणा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित राजस्थान संपर्क आईटी केन्द्र में आयोजित होगी।
अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ओ.पी. बुनकर ने जिले के समस्त विभागीय अधिकारियों को तय समयावधि में राजस्थान सम्पर्क पोर्टल व सीएम हेल्पलाइन 181 पर अपने विभाग से संबंधित परिवादों की प्रगति के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं-प्रशासन गांवों के संग अभियानगींगला शिविर में पहुंचे कलक्टर

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक   E–समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

INDIAN GOVERNMNET REGISTERED  (RNI -MPHIN /2020 /35645 )

कृपया सभी जन मास्क लगाए।  सोशल दुरी रखे।  बार – बार अपने हाथों को साबुन या सेनेटाइजर साफ़ करिये। भीड़ –भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचिए। अपना और अपने परिवार वालों का अपने बच्चो का ख्याल रखिये।  स्वस्थ्य रहिये –सुरक्षित रहिये।

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