मार्बल और ग्रेनाइट खदानों पर दूसरे दिन भी बंद रहा लदान

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राजसमंद / उदयपुर / ई समाचार मीडिया / बेतवा भूमि समाचार / देवेंद्र कुमार टांक : मार्बल पर रॉयल्टी बढ़ने के विरोध में बुधवार को दूसरे दिन भी मार्बल खदानों पर लदान बंद रहा। मार्बल ब्लॉक परिवहन करने वाले ट्रकों के चक्के थमे रहे। मार्बल खदान मालिकों के समर्थन में जिला मार्बल कटर एसोसिएशन ने भी अपने कटर बंद कर राज्य सरकार के खिलाफ रॉयल्टी बढ़ाने का विरोध किया। जिले सहित राज्यभर में हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।-मार्बल और ग्रेनाइट खदानों पर दूसरे दिन भी बंद रहा लदान

मार्बल और ग्रेनाइट खदानों पर दूसरे दिन भी बंद रहा लदान

केलवा चौपाटी स्थित मार्बल माइंस ओनर्स एसोसिएशन कार्यालय में अध्यक्ष गौरवसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में संभागस्तरीय अध्यक्षों से बातचीत के लिए बैठक हुई। जिसमें खान मंत्री प्रमाेद जैन भाया से मिलकर मार्बल व्यापारियाें की समस्याएं बताकर रॉयल्टी कम कराने का निर्णय लिया। मार्बल के कच्चे माल पर 21 प्रतिशत रॉयल्टी बढ़ाने के विरोध में मंगलवार देर शाम से ही जिलेभर के मार्बल माइंस, ग्रेनाइट खदानों से लदान बंद कर रखा है। इन खदानों पर काम करने वाले हजारों श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

इससे पहले मार्बल के कच्चे माल पर प्रति टन ₹265 रुपए की रॉयल्टी लगती थी, सरकार ने इस राशि में 21 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए ₹55 रुपए बढ़ाकर ₹320 रुपए कर दी हैं। इसके विरोध में जिलेभर से बुधवार से 1200 मार्बल माइंस, 300 ग्रेनाइट माइंस पर लदान बंद है। इसी के साथ ही मार्बल कटर भी बंद हैं।

हर दिन निकलता है 200 ट्रक कच्चा माल : हर रोज औसतन 200 ट्रकों में मार्बल का लदान होता था, लेकिन अब रॉयल्टी बढ़ने के बाद मार्बल का लदान बिल्कुल बंद है। खदानों से लदान बंद होने के बाद जिले में हर दिन करीब 40 लाख रुपए का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। जिससे राज्य सरकार को भी लाखों रुपए का राजस्व का नुकसान हो रहा है।

50 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर संकट : कोरोना महामारी की वजह से पूरा देश बंद रहा था। जिस कारण खदान मालिक से लेकर मजदूर बेरोजगार होकर घरों में बैठे रहे। जिससे करोड़ो रुपयों का नुकसान हुआ। अब राज्य सरकार ने रॉयल्टी दर बढ़ाने के कारण खदान बंद होने से व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़ा है। जिससे हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मार्बल माइंस, ग्रेनाइट, कटर और ट्रांसपोर्टेशन बंद होने से 50 हजार लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

7 दिन बाद गैंगसा कटर भी हो सकते हैं प्रभावित :  मार्बल माइंस से निकलने वाला कच्चा माल 60 प्रतिशत उदयपुर, किशनगढ़, चित्तौड़ और स्थानीय स्तर पर कटिंग होता है, जबकि 40 फीसदी माल दक्षिण भारत दिल्ली सहित विदेशों तक भेजा जाता है। मार्बल लदान बंद होने के बाद वर्तमान में मार्बल गैंगसा और कटर पर लगभग 7 दिन तक का स्टॉक रहता है। अगर मार्बल खदानाें पर 7 दिन तक लगातार लदान बंद रहता है तो एक सप्ताह बाद जिले के 3 हजार कटर और 500 मार्बल गैंगसा, 300 ग्रेनाइट गैंगसा भी बंद हो सकते हैं। ​​​​​​​-मार्बल और ग्रेनाइट खदानों पर दूसरे दिन भी बंद रहा लदान

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक   Eसमाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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