वैक्सीन लगने के बाद कोरोना तो हो सकता है परंतु गंभीर संक्रमण नहीं

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हेल्थ रिपोर्ट/ उदयपुर/ नई दिल्ली/ ई समाचार/ देवेंद्र कुमार टाक : हमारे एक्सपर्ट डॉक्टर विपी पांडे और डॉक्टर अजय पारीख  वैक्सीनेशन से जुड़ी तमाम भ्रांतियों और सवालों पर हमारे एक्सपर्ट ने लोगों की भ्रांतियों को दूर करने का पेश किया है जो हम हमारे चैनल द्वारा देश- विदेश की जनता तक पहुंचा रहे हैं, आइए जानते हैं क्या करना है विशेषज्ञों का मानना -वैक्सीन लगने के बाद कोरोना तो हो सकता है परंतु गंभीर संक्रमण नहीं

वैक्सीन लगने के बाद कोरोना तो हो सकता है परंतु गंभीर संक्रमण नहीं

1.वैक्सीन कोरोना को पूरी तरह रोक देगी या करो ना होने पर उसके असर को कम करेगी ? : वैक्सिंग कोरोनावायरस के असर को कम कर देगी यह शिल्ड है यानी कवच, वैक्सीन के बाद अगर कोरोना होता भी है तो, लंच को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी और सिर्फ सर्दी जुकाम रह जाएगा 

वैक्सीन की इफेक्टिवेनेस या ऐसी कैसी बताई जाती है कि वैक्सीन 84% या 91% लोगों को इंफेक्शन हो सकता है अभी तक के रिसर्च के मुताबिक रोग की गंभीरता को कम करने में वैक्सीन 100% तक इफेक्टिव हैं मृत्यु को 100% रोक सकती है

2.लोगों को वैक्सीन का पहला डोज लगाने के बाद भी कोरोना हो रहा है, ऐसा क्यों ? : एक्शन का पहला डोज लेते है तो वह शरीर को बताता है कि यह वायरस है, जो आपको इन फैक्ट कर सकता है, तब शरीर उससे लड़ने की क्षमता खुद ही विकसित कर लेता है, पहला डोज भी दो-चार सप्ताह में कुछ प्रतिशत तक एंटीबॉडी बना लेता है, यह अलग अलग व्यक्ति के लिए 50 से 70 फ़ीसदी तक होती है

वैक्सीन की संरचना कुछ ऐसी है कि वह शरीर में जाकर एंटीबॉडी रिएक्शन शुरु करती है शरीर में एंटीबॉडी बनाने में वक्त लगता है ऐसा नहीं है कि आज वैक्सिंग लगाई और शाम से इंफेक्शन नहीं होगा, अभी करो ना बात रमक हैं पहला डोज लगने के 15-20 दिन बाद एंटीबॉडी बनने लगती हैं पर वह इतनी नहीं कि  कोरोना को रोके सके, तभी दूसरा डोस लगाते ही एंटीबॉडी  का शरीर में विकसित होना तेज हो जाता है,जिसे बूस्टर कहते हैं

3. कुछ लोगों को वैक्सीन के दूसरे दोस्त के बाद भी कोरोना हो रहा है ,यह कैसे संभव है ? : इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए और यह भी नहीं सोचना चाहिए कि वैक्सीन प्रभावशाली नहीं है वैक्सीन का काम है कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करना,  वैक्सीन लगने के कारण ही दूसरे दोस्त के 15 दिन बाद शरीर में वायरस के गंभीर लक्षण पैदा करने की क्षमता शुन्य हो जाती है

अगर लोग वैक्सीन के दो रोज लेने के बाद दिलाई बढ़ते हुए तो इंफेक्शन का खतरा तो बढ़ेगा परंतु अच्छी बात यह है कि दूसरा डोस लगने के 15 दिन बाद हम कह सकते हैं कि वायरस  से हम इफेक्टेड हुए तो भी वह हमारे लिए गंभीर नहीं होगा, मृत्यु तक की तो नौबत ही नहीं आएगी, हमारे शरीर के एंटीबॉडीज उस वायरस को वही खत्म कर देगी, भारत में 21 अप्रैल तक सिर्फ 1 से 1.5% आबादी को ही दोनों दोस्त लग पाए हैं, 70% लोग टीका लगवा ले तो हर फेमिनिटी संभव है- देश में 18+ को वैक्सीन लग रही है तो मौका बिल्कुल मत छोड़िए और तुरंत वैक्सीन लगवाइए,क्योंकि यही आपकी संजीवनी बूटी है 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि टीके का खर्च नहीं उठा सकते हैं गरीब लोग : कोरोना से पैदा हुए संकट पर सोता है संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र के सामने सवालों की झड़ी लगा दी, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल एन राव और एसआर भट्ट की बेंच ने पूछा कि केंद्र, राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत अलग-अलग क्यों रखी गई है ?

शीर्ष अदालत ने सरकार को राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल अपनाने के बारे में विचार करने का सुझाव भी दिया है कहा कि टीके का खर्च तमाम गरीब नहीं उठा सकते हैं, जस्टिस भट्ट ने सवाल किया, वैक्सीन निर्माता 300 या ₹400 प्रति डोज दाम लगा रहे हैं, एक राष्ट्र के रूप में हमें इसका भुगतान क्यों करना चाहिए ? कीमत का अंतर 30 से 40000 करोड़ रुपए हो जाता है, जब हमने इसके लिए भुगतान किया है  मूल्य अंतर का कोई मतलब नहीं है हम निर्देश नहीं दे रहे हैं, मगर आपको गौर करना चाहिए, केंद्र 100% वैक्सीन क्यों नहीं खरीद रही-वैक्सीन लगने के बाद कोरोना तो हो सकता है परंतु गंभीर संक्रमण नहीं

केंद्र से शीर्ष अदालत के 6 बड़े सवाल :

1. हॉस्पिटलाइजेशन की स्पष्ट राष्ट्रीय नीति है ?

2. लोग इंटरनेट नहीं जानते या पढ़े लिखे नहीं हैं, उनके लिए वैक्सीन की क्या व्यवस्था है ?

3. शमशान कर्मियों के टीकाकरण की क्या योजना आपने बनाई है ?

4. जरूरी दवाओं के लिए पेटेंट की व्यवस्था क्या है ?

5. यह कैसे सुनिश्चित होगा कि वैक्सीन को लेकर 1 राज्यों को दूसरे पर प्राथमिकता नहीं मिलेगी ?

6. जरूरी दवाओं का उत्पादन व वितरण नहीं हो रहा है ? जनवरी को सक्षम करने के लिए क्यों ना आदेश जारी किया जाए 

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

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