वैज्ञानिकों ने मार्च में कोरोना के दूसरी लहर की दी चेतावनी केंद्र ने की नजरअंदाज

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एजेंसी/ नई दिल्ली/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : कोरोनावायरस के इस वैरीअंट का फरवरी महीने में ही  वैज्ञानिकों को लग गया था पता, वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार को अलर्ट भी किया था परंतु केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने नजरअंदाज कि वैज्ञानिकों की चेतावनी एवं समय रहते नहीं किया चिकित्सा व्यवस्था में इजाफा, इसी कारण आज देश में कोरोना से संबंधित यह हालत है-वैज्ञानिकों ने मार्च में कोरोना के दूसरी लहर की दी चेतावनी केंद्र ने की नजरअंदाज

सरकार की ओर से गठित वैज्ञानिक सलाहकार ओके एक फोरम ने मार्च की शुरुआत में भारतीय अधिकारियों को देश में एक नए और ज्यादा संक्रमण कोरोनावायरस पेशेंट के खेलने की चेतावनी दी थी, चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार ने वायरस के फैलाव को रोकने के लिए बड़े स्तर पर प्रतिबंध नहीं लगाए, फोरम में शामिल वैज्ञानिकों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी है 

वैज्ञानिकों ने मार्च में कोरोना के दूसरी लहर की दी  चेतावनी केंद्र ने की नजरअंदाज

वैज्ञानिक और उत्तर भारत में एक रिसर्च सेंटर के निदेशक ने पहचान नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि मार्च की शुरुआत में नए वेरिएंट को लेकर इंडियन सार्स- कोव -2 जेनेटिक्स कंसोर्सियम कंसोर्टियम (आईएनएसएसईओजी) ने यह जानकारी एक शीर्ष अधिकारी तक पहुंचाई थी 

जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, हालांकि रॉयटर्स यह पुष्टि नहीं कर सका कि क्या (आईएनएसएसईओजी) के निष्कर्ष खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाए गए थे या नहीं, क्योंकि वैज्ञानिकों मानना है कि अगर समय रहते केंद्र सरकार पाबंदियां बढ़ाती, एवं संक्रमण रोकने के लिए उपयुक्त व बड़े कदम उठाए गए होते तो शायद आज देश की स्थिति इतनी भयंकर नहीं होती, यह संक्रमण इतना तेजी से और इतना फैलाव नहीं करता

बताया था तेज हो सकता है संक्रमण ( फोरम) : फोरम के सदस्य और सरकार की ओर से संचालित जीव विज्ञान संस्थान के निदेशक अजय परीदा के अनुसार (आईएनएसएसईओजी) के रिसर्चरों ने फरवरी में ही वायरस के भारतीय वैरीअंट बी.1.617 का पता लगा लिया था फोरम ने अपने निष्कर्ष 10 मार्च से पहले नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के साथ साझा कर दिए थे

और केंद्र सरकार को चेतावनी  दी थी कि संक्रमण देश में तेजी से बढ़ सकता है, नए भारतीय वैरीअंट के दो अहम म्यूटेशन है, जो इंसानी कोशिकाओं से चिपक जाते हैं उन्हें महाराष्ट्र के 15 से 20 फ़ीसदी सैंपल में वैरीअंट मिला था, एवं केंद्र सरकार को चेताया था कि इस वैरिंट से निपटने के लिए पहले ही उचित कदम उठा लिया जाए, हॉस्पिटलों से लेकर सभी जरूरत की चीजों के लिए केंद्र सरकार ध्यान केंद्रित करें एवं इस संक्रमण को फैला से बचाने के लिए व्यवस्था करें

सरकार ने नहीं लिया गंभीरता से : इस साल 7 मार्च को स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने दावा किया था कि कोविड-19 की ओर है, हालांकि उन्होंने फरवरी के मध्य में डब्ल्यूएचओ की ओर से दी गई चेतावनी पर ध्यान देना उचित नहीं समझा, उन्होंने मान लिया कि कोविड-19 जैसी महामारी भारत से जड़ से खत्म हो गई है परंतु यह उनकी गलतफहमी थी, या फिर ऐसा कह सकते हैं कि यह उनका और कॉन्फिडेंस था जिसके कारण देश के करोड़ों लोग आज जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं एवं बच्चे हुए खतरे के निशान पर है

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन सिंह एवं केंद्र सरकार ने अपने पड़ोसी देशों/विदेशों से भी सबक नहीं लिया क्योंकि ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस, नार्वे, न्यू जीलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों ने बहुत ही सजग तरीके से कोरोनावायरस पर जीत हासिल की है, इसका मुख्य श्री इन देशों की सरकार तथा इनकी प्लानिंग पर जाता है, इन्होंने लोगों को बिना पैनिक किए, लंबा लॉकडाउन रखा, एवं हर इंसान को आजीविका से लेकर जरूरतमंद की चीजों तक का ध्यान रखा जिससे लोग, नाराज नहीं हुए, गुस्सा नहीं हुए, और अपना ज्यादा समय घरों में बैठकर निकाला

इन देशों की सरकारों ने देश की जनता को घर बैठे सैलरी दी जिससे उनकी आजीविका चलती रहे तथा लोग टेंशन नहीं ले और कोई भी आत्महत्या जैसा अनुचित कदम नहीं उठाए, परंतु भारत में ऐसा नहीं था केंद्र सरकार ने पिछले साल हाय कोरोना महामारी के रहते बहुत से सराहनीय कार्य किए थे, परंतु जैसे कोरोना के केस कम हुए तो सरकार ने इस महामारी पर ध्यान देना छोड़ दिया, और आप अपना पूरा ध्यान बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव में लगा दिया-वैज्ञानिकों ने मार्च में कोरोना के दूसरी लहर की दी चेतावनी केंद्र ने की नजरअंदाज

और राज्य सरकारों ने अपने राज्यों की जनता की स्थिति बहुत ही खराब कर दी, एक तरफ से तो लोग भुखमरी और बेरोजगारी से परेशान थे, क्योंकि देश में लगभग 70 दिन का सख्त लॉकडाउन था,जिसके कारण लोग बहुत ही दुखी हो गए थे क्योंकि इनके पास न तो नौकरी थी और ना ही घर का खर्चा चलाने के लिए पैसे, ऐसे में राज्य सरकार को अपने राज्य की जनता के लिए आर्थिक सहायता करनी चाहिए थी जैसा कि विदेशों में किया गया था

परंतु राज्य सरकार ने हर चीज का दाम दोगुना कर दिया, बिजली, जल, घरेलू गैस, पेट्रोल- डीजल, खाद्य सामग्री, डेरी, ग्रॉसरी, टैक्स, आदि की कीमतें बढ़ा दी गई, जिससे लोगों को आर्थिक सहायता तो नहीं मिली परंतु बहुत से लोगों ने इस बेरोजगारी और भुखमरी से परेशान होकर अपनी जान दे दी, सरकार चाहे कोई भी हो इनको सिर्फ अपने फायदे से मतलब है, देश की राज्य की जनता के साथ क्या होता है उनसे उनको कोई लेना देना नहीं है, इनको तो सिर्फ प्यारी है अपनी कुर्सी, अपनी सत्ता और यह इसके लिए कुछ भी कर सकते-वैज्ञानिकों ने मार्च में कोरोना के दूसरी लहर की दी चेतावनी केंद्र ने की नजरअंदाज

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

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