चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन

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एजेंसी/ तिब्बत/ चीन/ नई दिल्ली/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : तिब्बत में चीन के एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ने सामरिक स्तर पर भारत के लिए चिंता पैदा कर दी है, 41630 करोड़ रुपए लागत की 435 किमी लंबी रेलवे लाइन के इस माह शुरू होने की पूरी संभावना है-चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन-चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन

रेलवे लाइन तिब्बत की राजधानी ल्हासा को पूर्वी शहर निंगची से जोड़ेगी जिसे तिब्बती सूर्य का सिंहासन कहते हैं,सरकारी अधिकारी क्षेत्र की पहली विद्युतीकरण रेल लाइन को कम्युनिस्ट पार्टी की 100वी सालगिरह ( आने वाली 1 जुलाई) का उपहार माना जा रहा है

नई रेलवे लाइन भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के नजदीक से गुजर रही है, चीन कई अरुणाचल प्रदेश राज्य पर अपना दावा जता चुका है, वह इसे दक्षिण तिब्बत कहता है, 1962 के युद्ध में चीनी सेना ने यहां धावा बोल दिया था, रेल लाइन के अलावा इलाके में चल रहे चीन के अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से भारत काफी नाराज हैं

नई रेलवे लाइन ब्रह्मपुत्र नदी ( चीन इस नदी को यारलंग त्संगपो नदी कहता है) के ऊपरी हिस्सों को 16 बार पार करती हैं, भारत ने चीन पर पानी की उपलब्धता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है उपासना यूनिवर्सिटी के अशोक स्वयं कहते हैं, चीन  इसकी फिक्र नहीं करता है, इसमें चीन के अंदरूनी इलाकों को तिब्बत से जोड़ने के लिए रेल लाइन के निर्माण की योजना शामिल है

सरकारी मीडिया बताता है कि इसकी लागत ल्हासा – निंगची ट्रैक से 10 गुना अधिक होगी इस माह शुरू होने वाली रेल लाइन के लगभग आधे हिस्से में सुरंग के हैं, कामगारों को समुद्र सतह से 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा है, 2030 में प्रोजेक्ट पूरा होगा यह ल्हासा को सिचुआन प्रांत की राजधानी चेगंडू से जुड़ेगा 

तिब्बत में पहली रेल लाइन 2006 में शुरू हुई थी, इसका प्रभाव पर्यटन पर पड़ा है, 2005 में सैलानियों ने 20 लाख से कम यात्रा की थी 2018 में यात्रियों की संख्या बढ़कर तीन करोड़ 30 लाख हो गई है,भारत यह कतई नहीं चाहेगा कि चीन के ऊपर हावी हो या चीन के ऐसे कोई भी निर्माण के कारण भारत की भौगोलिक स्थिति पर कोई फर्क पड़े.

भारत और चीन के बीच में पहले से ही एलएसी पर बलवान घाटी में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक काफी उपद्रव मचा है, चीनी सेना और भारतीय सेना के बीच में विवाद भी हुआ है इसमें लगभग 20 से 25 भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं एवं चीन के भी 80 सैनिक शहीद हुए हैं, फिलहाल दोनों देश के उच्च अधिकारियों की वार्तालाप के बाद यह सहमति बनी है कि दोनों देश की सेना अपने अपने स्थान से पीछे हटेगी, परंतु चीन की तरफ से ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा है

चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन

यह स्थिति दिन पर दिन गंभीर बनती जा रही हैं, भारत ने रुख साफ कर दिया है कि अगर 3 अपनी यथास्थिति पर वापस लौटेगा तभी भारतीय सेना अपने कदम पीछे हटाएगी,भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री एवं भारतीय सेना प्रमुख ने यह साफ-साफ बता दिया है कि चीन अपनी हद में रहें, भारतीय फौज हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं, परंतु भारत नहीं चाहता कि विवाद को बढ़ाया जाए या सीमा पर कुछ भी अनहोनी घटित हो

इसलिए भारत यही चाहता है कि शांति वार्ता से और दोनों देश समझदारी बताते हुए अपने अपने पुराने स्थान पर लौट जाएं.भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को साफ साफ संदेश दे दिया है कि भारत अपनी पवित्र भूमि पर किसी को भी पांव नहीं रखने देगा-चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन-चीन ने तैयार की तिब्बत में 435 किमी लंबी रेलवे लाइन

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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