कोरोना से ठीक हुए बच्चों के हार्ट- फेफड़े और दिमाग पर खतरा

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हेल्थ रिपोर्ट/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : देश के ऊपर नया संकट आन पड़ा है अकेले राजस्थान प्रदेश में ही 6 महीने में 500 बच्चों के मल्टी ऑर्गन फेल होने की शिकायत आई है एवं इससे 8 बच्चों की मौत भी हो चुकी हैं, यह सभी बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए थे तथा कोरोना का उपचार होने के बाद पूरी तरह ठीक हो गए थे-कोरोना से ठीक हुए बच्चों के हार्ट- फेफड़े और दिमाग पर खतरा

अचानक इनमें हार्ट, फेफड़े और दिमाग आदि प्रभावित हुए एवं कई बच्चों में पैरालिसिस का भी खतरा देखा गया है, इस बीमारी को एमआईएस नाम दिया गया है, मेडिकल भाषा में एमआईएस का मतलब है कि मरीज को पहले बुखार आता है फिर बाद में शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे हॉट, लंग और दिमाग काम करना बंद कर देता है

देश में अगर कोरोना की तीसरी लहर को नहीं रोका गया, तो देश के बच्चों पर बुरा असर पड़ने वाला है, इसी लिए सरकार एवं चिकित्सा विभाग इसी कोशिश में लगे हुए हैं कि कैसे भी करके कोरोना की तीसरी लहर को देश में आने से रोका जाए, इसके लिए सरकार और प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी एवं समझदारी बहुत ही महत्वपूर्ण है

क्योंकि जनता जब तक पूरी ईमानदारी के साथ कोरोना गाइडलाइन की पालना नहीं करेगी जब तक कोरोना संक्रमण से निजात पाना रेगिस्तान में पानी का कुआं बनाना जैसा है, सरकार, प्रशासन, चिकित्सा विभाग चाहे कितनी ही कोशिश है कर ले परंतु जब तक देश का आम इंसान अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझेगा तब तक कोरोना तो बहुत दूर की बात है हम छोटे मोटे इन्फेक्शन को भी खत्म नहीं कर पाएंगे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में एमआईएस बीमारी की पुष्टि हुई है, एक्सपर्ट का कहना है कि यह बीमारी ब्लैक फंगस से भी बहुत बड़ी है, सरकार के पास इस बीमारी के आंकड़े तक नहीं है, तीसरी लहराई तो हालात  बहुत ही भयावह होंगे, यह बीमारी उन्हीं बच्चों को हुई जिन्हें कोरोना संक्रमण हुआ था, यानी अब बच्चों का बहुत ही ख्याल रखना होगा

एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि इस बीमारी में 3-6 दिन बुखार रहता है बाद में ब्लड प्रेशर भी गिरता जाता है : जेके लोन अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अशोक गुप्ता और डॉ आर के गुप्ता के अनुसार कोरोना संक्रमण से अधिक प्रभावित बच्चों में दो तरह के बदलाव देखने को मिले हैं, बच्चों में निमोनिया या फिर एंटीबॉडी से संबंधित इन्फ्लेमेशन भी देखा जा रहा है

बच्चों में एमआईएस का मतलब पहले बुखार आता है, फिर शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे हॉट, है और ब्रेन प्रभावित होते हैं, 3 से 5 दिन तक बुखार, पेट तेज दर्द, ब्लड प्रेशर अचानक गिरने लगता है, एम आई एस जैसी खतरनाक बीमारी में शरीर के कई अंगों में एक साथ इन्फ्लेमेशन हो जाता है, शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम ही नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं यह इम्यून सिस्टम के ओवर रिएक्शन से होता है

एमआईएस बीमारी के मुख्य लक्षण : बच्चे की हथेली- आंख, चेहरा लाल हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं – इसमें बच्चों की हथेलियां और आंखें, चेहरा अजीब लाल होने लगती है, यह शुरुआती लक्षण है अधिक दिन बीतने के साथ हॉट कम काम करने लगता है, क्योंकि हाट की धमनियां कोविड-19 जैसे खराब हो जाती है इसके अलावा दस्त, उल्टी, पेट में दर्द भी इसके मुख्य लक्षण हैं

बाद में किडनी, लीवर में इन्फेक्शन तक हो जाता है, कई ऐसे भी बच्चे आए हैं जिनके तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द, हाथों में रक्त स्त्राव, पीलिया, बेहोशी तक थी, इसके अलावा इसकी गंभीरता में किसी भी पेशेंट में खून में थक्का जम सकता है, कई बच्चों में पैरालिसिस तक हो सकता है इसलिए लक्षणों पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी है एवं विशेषकर बच्चों का सावधानी से ध्यान रखें

कोरोना से ठीक हुए बच्चों के हार्ट- फेफड़े और दिमाग पर खतरा

विशेषज्ञों की सलाह ( डॉ अशोक गुप्ता और डॉ आर के गुप्ता- शिशु रोग विशेषज्ञ, जयपुर) : अगर बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो समय पर अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाएं तो ही इस बीमारी से बचा जा सकता है, पिछले एक- डेढ़ महीने में एमआईएस- सी के काफी केस बड़े हैं,  कोविड की वजह है, हथेलियां, आंखें, चेहरा वाजिब लाल हो रही हैं और बुखार कई दिन तक नहीं उतर रहा है तो यह एमआईएस- सी होने की संभावना ज्यादा है, अगर समय पर बच्चे अस्पताल आ जाए तो बचा पाना आसान होगा-कोरोना से ठीक हुए बच्चों के हार्ट- फेफड़े और दिमाग पर खतरा

विशेषज्ञ बोले : कोरोना के रूप में बदलाव से बच्चों में ज्यादा खतरा : नीति आयोग के सदस्य वी के पोल के अनुसार वायरस में बदलाव के कारण बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के कारण 2% से 4% को ही अस्पताल की जरूरत पड़ती है, पहले रूप में बुखार, खांसी और निमोनिया के बाद बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है, लेकिन दूसरे रूप में रिकवरी के 2 से 6 सप्ताह बाद कुछ बच्चे में फिर बुखार डायरिया और सांस फूलने की दिक्कत सामने आई है

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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