ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

हेल्थ रिपोर्ट/ अजमेर/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो गया है, कहीं ऑक्सीजन सेंट्रल पाइप लाइन की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई तो कहीं विस्तार नहीं हुआ, ऐसे में संभाग इसलिए मेडिकल कॉलेज के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों कि रोजाना मौत हो रही है-ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

हालात इतने भयावह है कि अस्पताल मैं बेड फुल होने पर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा, अस्पताल के बाहर सड़क पर दम तोड़ती महिला रोगी के वायरल हुए वीडियो ने भी अस्पताल व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, राज्य के हालात इतने डरावने हैं कि अजमेर, किशनगढ़,ब्यावर के सरकारी व निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित हो की मौतों के आंकड़े जारी ही नहीं किए जा रहे हैं

अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में ऑक्सीजन, भाई पर मशीनें वेंटिलेटर सहित करीब 585 बेड है, इनमें 80 बेड वेंटिलेटर संचालित हैं,वर्तमान में संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होने के बावजूद इन से अधिक मरीजों को जेएलएन अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है

इधर अजमेर में ही महिला को अस्पताल के गेट पर सुरक्षा गार्डो ने रोका- समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण महिला ने अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दिया – मृतक के परिजनों का आरोप है कि गेट पर सुरक्षा गार्डो ने बेड खाली नहीं होने की बात कह कर अंदर ही नहीं जाने दिया

अस्पताल में इलाज के अभाव में मरीज सड़क पर दम तोड़ने लगे हैं संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के सामने का भी ऐसा ही एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेड खाली नहीं होने की बात कह कर अस्पताल में प्रवेश नहीं दिया गया

इस कारण महिला की अस्पताल के गेट के सामने ही मौत हो गई, वीडियो में अस्पताल के गेट के सामने खड़ी बहन के पास एक महिला जमीन पर निकल पड़ी नजर आ रही हैं, कुछ परिजन उसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं वही घटना का वीडियो बना रहे महिला का बेटा आरोप लगाते हुए कहा है कि हमें जेएलएन अस्पताल के गेट पर ही रोक दिया गया…

यह कह कर रोका गया कि अंदर बेड खाली नहीं है इसलिए मेरी मां ने सड़क पर दम तोड़ दिया मामले में कोतवाली थाना प्रभारी शमशेर खान का कहना है कि रविवार सुबह कुछ लोग एक वृद्ध महिला को चिकित्सालय के कोविड-19 के लिए लेकर आए थे, महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात जवानों ने उन्हें वाहन सहित अंदर जाने को कहा

डॉ नीरज गुप्ता ( कार्यवाहक अधीक्षक जेएलएन अस्पताल अजमेर ) : अस्पताल के अंदर ना तो कोई मरीज आया ना कोई आया, हमें घटना की जानकारी नहीं मिली है, अस्पताल में कल ही रात तक मत रुको रुको भर्ती किया गया है- परंतु मृतक महिला के बारे में हमें कोई पता नहीं है, अगर हमारे पास कोई आता तो हम जरूर उसे भर्ती कर दे और उसका इलाज करते

डॉक्टर नीरज ने ऐसा कह कर अपने-अपने जाट लिए परंतु यह अच्छी बात नहीं है, आपके अस्पताल के गेट के बाहर किसी व्यक्ति की मौत होती है और आपको पता नहीं चलता है यह बहुत ही दुखदाई है एवं दुर्भाग्यपूर्ण भी, हॉस्पिटल व्यवस्था मैं बहुत कमी है, आपके गार्ड ने मरीज को अंदर आने से रोका, ऐसा उस गार्ड ने आपकी मर्जी के बिना नहीं किया होगा, क्योंकि गार्ड तथा कर्मचारियों का संचालन हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी के हाथ में होता है

ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

और इस हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी आप हैं, अगर आपके हॉस्पिटल में किसी मरीज के साथ गलत होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी आपकी बनती हैं, डॉक्टर को लोग भगवान मानते हैं, परंतु आज के समय में यही भगवान लोगों की जान लेने का एक जरिया बन गया है, पैसा कमाने का एक जरिया बन गया है,

आज का यह भगवान, मानवता, करुणा, इंसानियत,पेशा, दया भाव सब कुछ भूल गया है इसे सिर्फ याद है तो रुतबा और पैसा इसके लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं,किसी बेकसूर की जान भी ले सकते हैं- यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है- आज देवलोक में बैठा हुआ भगवान भी इंसान की करतूत से बहुत शर्मिंदा होगा-ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

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