शहर के अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम वह बिजली व्यवस्था जीरो

सिटी रिपोर्ट/ रिपोर्टर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : नगर निगम अग्निशमन दस्ते ने शहर के विभिन्न चिकित्सालय का निरीक्षण किया तो उन्हें फायर फाइटिंग सिस्टम में कई खामियां मिली, नगर निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ ने समस्त अस्पतालों अस्पताल प्रबंधन को इन खामियों को जल्द दूर करने के के लिए अवगत कराया, जिससे फायर फाइटर सिस्टम कार्यरत अवस्था में रहे ताकि आग लगने के दौरान जनहानि नहीं हो-शहर के अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम वह बिजली व्यवस्था जीरो

शहर के अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम वह बिजली व्यवस्था जीरो

नगर निगम महापौर गोविंद सिंह टाक ने बताया कि अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास के नेतृत्व में टीम ने शहर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय, सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय, जनाना चिकित्सालय, महाराणा भोपाल चिकित्सालय स्थित कोविड-19 हॉस्पिटल, ईएसआईसी हॉस्पिटल,गीतांजलि हॉस्पिटल में निरीक्षण कर स्थापित अग्निशमन उपकरणों यंत्रों की जांच की तो कई जगह खामियां मिली

आयुक्त हिम्मत से बाहर 8 व उपमहापौर पार सिंह ने इस पर चिकित्सा चिकित्सालय प्रशासन को अवगत कराते हुए तुरंत इन उपकरणों में सुधार के लिए पत्र द्वारा नोटिस दिया गया, अधिकारियों का कहना है कि यह जांच लगातार जारी रहेगी, इसके बावजूद लापरवाही बरतने वाले अस्पताल के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी

अग्निशमन कर्मियों द्वारा छोटी-  मोटी खामियों को मौके पर ही ठीक किया गया : जिला अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एवं अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी भी मौजूद रहे, निगम की टीम द्वारा निरीक्षण में मिली छोटी मोटी खामियों को मौके पर ही ठीक कर दिया गया एवं जो बड़ी बड़ी खामियां हैं उन्हें 24 घंटे के अंदर अंदर ठीक कराने के अस्पतालों को निर्देश नोटिस द्वारा दे दिए गए हैं

इधर विद्युत विभाग के इंजीनियरों और दमकल दल ने शहर के तमाम अफसरों की जांच पड़ताल की जांच में ज्यादातर अस्पतालों में बिजली के बंदोबस्त घटिया मिले जहां बड़े फॉल्ट से चिकित्सा व्यवस्था बाधित होने और आग से भारी नुकसान की आशंका जताई गई 

विद्युत निगम मुख्यालय से मिले आदेश के बाद इंजीनियरों ने अस्पतालों का निरीक्षण किया शुरुआत में एमबी अस्पताल और एसएसबी की व्यवस्था देखने के बाद सोमवार को ईएसआई हॉस्पिटल, हिरण मगरी सेटेलाइट हॉस्पिटल के अलावा निजी क्षेत्र के सुधारों का निरीक्षण किया गया-शहर के अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम वह बिजली व्यवस्था जीरो

कहीं अस्पतालों में व्यवस्थाएं थी जिसके कारण भविष्य में कभी भी बड़ी घटना हो सकती हैं जिससे बड़ी जनहानि होने का अंदेशा भी है, कहीं जनरेटर की पावर अर्थिंग नहीं थी तो कहीं बिजली पैनल के आसपास कचरे का ढेर मिला मधुबन सब डिविजन के ए एन एच पी शर्मा ने बताया कि एक अस्पताल में तो जनरेटर सेट और बिजली पैनल के बीच की जगह पर अस्पताल का कचरा जलता हुआ पाया गया, जबकि जलते कचरे के नीचे से ही बिजली की केबल डाली हुई थी

कोरोना के कहर से शहर के समस्त अस्पताल मरीजों से फूल है, वहां बिजली से संचालित उपकरण से लेकर काफी मात्रा में काम में लिए जा रहे हैं, मरीजों को बचाने के लिए चिकित्सक व उनकी टीम को रोना की तरह खड़ी है लेकिन इससे परे अस्पताल में रख रखाव के अभाव में फायर फाइटिंग सिस्टम से लेकर बिजली के बंदोबस्त खराब हालत में पड़े हैं

देश के अलग-अलग हॉस्पिटल में इसी तरह की खराबी के चलते शॉर्ट सर्किट से कई जगह आग लगी है, और उस आग में कई जनहानि हुई हैं और उपकरण जलकर नष्ट हो गए हैं, इस घटना से सबक लेकर सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने यहां के अस्पतालों की जांच कराई तो अस्पतालों के घटिया सिस्टम की पोल खुल गई, फायर फाइटिंग सिस्टम के साथ ही बिजली व्यवस्था खराब हालत में मिली

नगर निगम बिजली निगम की टीम ने अस्पतालों का दौरा कर प्रबंधकों को इससे अवगत कराते हुए दूसरी करण के लिए कहा था कि शहर के अस्पतालों में आग की घटनाओं को रोका जा सके, और के रहते अगर आग लग जाती है तो फायर फाइटिंग सिस्टम तरोताजा मिले तो उस आग पर काबू पाया जा सके और बड़ी जनहानि होने से बचा जा सके

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

कोरोना मरीजों के लिए निजी अस्पताल कर रहे हैं अपनी मनमानी

हेल्थ रिपोर्ट/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : जयपुर प्रशासन और चिकित्सा विभाग के दावों के बीच राजधानी के हालात बहुत ही खतरनाक होते जा रहे हैं, 90 से कम ऑक्सीजन स्तर वाले कोरोना मरीज को निजी अस्पताल जवाब दे रहे हैं कि भर्ती तो हम कर लेंगे मगर आप को ऑक्सीजन स्वयं साथ में लानी होगी या ऑक्सीजन की व्यवस्था आप स्वयं को करनी होगी-कोरोना मरीजों के लिए निजी अस्पताल कर रहे हैं अपनी मनमानी

कोरोना मरीजों  के लिए निजी अस्पताल कर रहे हैं अपनी मनमानी

कारण है कि संबंधित अधिकारी ऑक्सीजन वर रेमडेसिवीर के लिए जरूरत का आकलन नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में इनका वितरण मनमर्जी से हो रहा है और मरीजों की सांसों पर संकट गहराता जा रहा है, हमारी छानबीन में सामने आया कि निजी अस्पताल में भर्ती होने के लिए आया करो ना मेरी जो की जरूरत के मुताबिक जितनी ऑप्शन मांग रहे हैं

उस से 30 से 50% तक कम ऑक्सीजन मिल रही है, जबकि अस्पतालों में कई संतों को उच्च प्रेशर से उस दिन की आवश्यकता है, वैसे में चिकित्सा विभाग व अस्पतालों द्वारा मरीजों पर ध्यान ना देना बहुत ही दर्दनाक दुर्भाग्यपूर्ण है, कोई भी अस्पताल चाहे वह निजी हो या सरकारी मरीज को सीधा यह नहीं कह सकता कि हम आपको बढ़ती तो कर लेंगे उसी दिन आप खुद लेकर आइए

अगर ऐसे जवाब सुनने हैं तो जनता ने अपने जनप्रतिनिधि क्यों विधानसभा में बैठे हैं ?, क्यों जनता ने अपने जनप्रतिनिधि के द्वारा सरकार को चुना गया है ? जनता पर वो करोड़ों रुपए टैक्स करती हैं और मुसीबत के समय जब सरकारें इस जनता की मदद के लिए आगे नहीं आएगी तो यह पैसा किस काम का ? यह जनता का पैसा है और जनता के लिए काम आना चाहिए

ऑक्सीजन नहीं होने पर जिम्मेदारी किसकी ? : कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने की समाचार को बताया कि सामान्य पलंग तो कहीं जगह उपलब्ध हैं लेकिन ऑक्सीजन नहीं है किसी संक्रमित को प्रति कर तो लें और उसे ऑक्सीजन नहीं मिले तो जिम्मेदारी हमारी बन जाती हैं भर्ती करने से इनकार करना पड़ रहा है

केंद्र को नसीहत राज्य में मरीजों से भेदभाव : विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार ने केंद्र से तो एक्टिव केस के आधार पर राज्यों को संसाधन आवंटन करने की मांग की जबकि राजस्थान में सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बीच भेदभाव किया जा रहा है- हॉस्पिटल में भर्ती से लेकर, दवाइयां, एवं ऑक्सीजन इन सभी में लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है

चिंताजनक है  बड़ेबड़े अस्पतालों के हालात :

1. प्रताप नगर के एक संक्रमित ने निजी अस्पताल में संपर्क किया तो जवाब मिला उस दिन नहीं है, इसकी व्यवस्था कर के लाओ तो मरीज को भर्ती कर लेंगे

2. गोनेर के एक संक्रमित को लेकर परिजन 24 घंटे तक परेशान होते रहे आर यू एच एस से लेकर निजी अस्पतालों तक पड़ताल की लेकिन पलंग मिला ही नहीं और उसे भर्ती नहीं कर दिया गया

3. किशनगढ़ अजमेर में बैठ नहीं मिलने पर किशनगढ़ से एक संक्रमित को परिजन जयपुर ले जाना चाहते थे लेकिन यहां भी पलंग नहीं मिला- राज्य की राजधानी में इतनी बड़ी व्यवस्था होने के बावजूद भी वहां पर हॉस्पिटलों में पलंग उपलब्ध नहीं है

4. सवाई माधोपुर के संक्रमित को परिजन जयपुर में भर्ती कराना चाहते थे लेकिन किसी स्थान नहीं मिला सवाई माधोपुर में ही उपचार शुरू करवाया गया, संसाधनों की कमी के कारण उनकी मृत्यु हो गई- यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है -कोरोना मरीजों के लिए निजी अस्पताल कर रहे हैं अपनी मनमानी

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

हेल्थ रिपोर्ट/ अजमेर/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो गया है, कहीं ऑक्सीजन सेंट्रल पाइप लाइन की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई तो कहीं विस्तार नहीं हुआ, ऐसे में संभाग इसलिए मेडिकल कॉलेज के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों कि रोजाना मौत हो रही है-ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

हालात इतने भयावह है कि अस्पताल मैं बेड फुल होने पर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा, अस्पताल के बाहर सड़क पर दम तोड़ती महिला रोगी के वायरल हुए वीडियो ने भी अस्पताल व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, राज्य के हालात इतने डरावने हैं कि अजमेर, किशनगढ़,ब्यावर के सरकारी व निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित हो की मौतों के आंकड़े जारी ही नहीं किए जा रहे हैं

अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में ऑक्सीजन, भाई पर मशीनें वेंटिलेटर सहित करीब 585 बेड है, इनमें 80 बेड वेंटिलेटर संचालित हैं,वर्तमान में संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होने के बावजूद इन से अधिक मरीजों को जेएलएन अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है

इधर अजमेर में ही महिला को अस्पताल के गेट पर सुरक्षा गार्डो ने रोका- समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण महिला ने अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दिया – मृतक के परिजनों का आरोप है कि गेट पर सुरक्षा गार्डो ने बेड खाली नहीं होने की बात कह कर अंदर ही नहीं जाने दिया

अस्पताल में इलाज के अभाव में मरीज सड़क पर दम तोड़ने लगे हैं संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के सामने का भी ऐसा ही एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेड खाली नहीं होने की बात कह कर अस्पताल में प्रवेश नहीं दिया गया

इस कारण महिला की अस्पताल के गेट के सामने ही मौत हो गई, वीडियो में अस्पताल के गेट के सामने खड़ी बहन के पास एक महिला जमीन पर निकल पड़ी नजर आ रही हैं, कुछ परिजन उसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं वही घटना का वीडियो बना रहे महिला का बेटा आरोप लगाते हुए कहा है कि हमें जेएलएन अस्पताल के गेट पर ही रोक दिया गया…

यह कह कर रोका गया कि अंदर बेड खाली नहीं है इसलिए मेरी मां ने सड़क पर दम तोड़ दिया मामले में कोतवाली थाना प्रभारी शमशेर खान का कहना है कि रविवार सुबह कुछ लोग एक वृद्ध महिला को चिकित्सालय के कोविड-19 के लिए लेकर आए थे, महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात जवानों ने उन्हें वाहन सहित अंदर जाने को कहा

डॉ नीरज गुप्ता ( कार्यवाहक अधीक्षक जेएलएन अस्पताल अजमेर ) : अस्पताल के अंदर ना तो कोई मरीज आया ना कोई आया, हमें घटना की जानकारी नहीं मिली है, अस्पताल में कल ही रात तक मत रुको रुको भर्ती किया गया है- परंतु मृतक महिला के बारे में हमें कोई पता नहीं है, अगर हमारे पास कोई आता तो हम जरूर उसे भर्ती कर दे और उसका इलाज करते

डॉक्टर नीरज ने ऐसा कह कर अपने-अपने जाट लिए परंतु यह अच्छी बात नहीं है, आपके अस्पताल के गेट के बाहर किसी व्यक्ति की मौत होती है और आपको पता नहीं चलता है यह बहुत ही दुखदाई है एवं दुर्भाग्यपूर्ण भी, हॉस्पिटल व्यवस्था मैं बहुत कमी है, आपके गार्ड ने मरीज को अंदर आने से रोका, ऐसा उस गार्ड ने आपकी मर्जी के बिना नहीं किया होगा, क्योंकि गार्ड तथा कर्मचारियों का संचालन हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी के हाथ में होता है

ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

और इस हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी आप हैं, अगर आपके हॉस्पिटल में किसी मरीज के साथ गलत होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी आपकी बनती हैं, डॉक्टर को लोग भगवान मानते हैं, परंतु आज के समय में यही भगवान लोगों की जान लेने का एक जरिया बन गया है, पैसा कमाने का एक जरिया बन गया है,

आज का यह भगवान, मानवता, करुणा, इंसानियत,पेशा, दया भाव सब कुछ भूल गया है इसे सिर्फ याद है तो रुतबा और पैसा इसके लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं,किसी बेकसूर की जान भी ले सकते हैं- यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है- आज देवलोक में बैठा हुआ भगवान भी इंसान की करतूत से बहुत शर्मिंदा होगा-ऑक्सीजन का इंतजार मरीजों के ले रहा है प्राण

देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

नहीं थम रहा अस्पतालों में कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी का खेल

सिटी रिपोर्ट/ उदयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : एंबुलेंस से शव ले जाने के कमीशन बाजी के इस खेल में सर्वाधिक संभाग के ग्रामीण लोग ठगे जा रहे हैं, ऐसे लोगों को शर्म तक नहीं आती ऐसा अमानवीय व्यवहार करते हुए, कुछेक कर्मचारियों में मानवता मर गई हैं, इंसानियत को तार-तार कर दिया है, ऐसी स्थिति में भी लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं- “यह इंसान नहीं यह राक्षस है”-नहीं थम रहा अस्पतालों में कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी का खेल

मौत होते ही अस्पताल कर्मी कमीशन वाले एंबुलेंस चालक को कॉल करके बुलाते हैं, वे उन्हें कोरोना का डर दिखाकर सीधा सीधा मुंह मांगा पैसा वसूलते हैं, चित्रकूट नगर स्थित ईएसआई अस्पताल में संभाग के जिलों के 6 जिलों के अलावा सिरोही, जालोर व मध्यप्रदेश के नीमच, जावरा, रतलाम, मंदसौर तक के लोग इलाज के लिए यहां आ रहे हैं

जांच में कोरोना पॉजिटिव होते ही उन्हें ईएसआई अस्पताल रेफर किया जा रहा है, गंभीर बात यह है कि यहां किसी बाहरी व्यक्ति की मौत होने पर शव को उनके घर छोड़ने के लिए मुंह मांगा दाम वसूला जा रहा है, मजबूरी में लोग करें तो भी क्या करें, ऐसी मजबूरी में लोग तय राशि के बाद भी ज्यादा पैसे देकर एंबुलेंस ए सब ले जाने पर मजबूर हैं 

कोरोनावायरस संक्रमण से मौत के बाद सब को इधर-उधर लाने ले जाने में कहां-कहां किस हद तक वसूली हो रही है, इसका जब आपको पता चलेगा तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी, यह गमजदा परिवार से ज्यादा कोई नहीं जान सकता है, मुर्दाघर से मोक्ष धाम तक वसूली ओं की गड़बड़ी हमारे चैनल ने उजागर की तो नगर निगम ने उन पर लगाम लगाना मोस्ट दाम पर कर्मचारियों की नियुक्तियां की

वही मुर्दाघर में पुलिस का पहरा लगाया है, लेकिन शव के नाम पर कमाई करने वाले कहीं से भी रास्ता निकाल कर वसूली करने से बाज नहीं आ रहे हैं, ई समाचार मीडिया ने चित्रकूट नगर ईएसआई अस्पताल के बाहर क्षेत्र में मरीजों की मौत के हाल को जाना तो वह कुछ एंबुलेंस चालकों की अवैध वसूली या सामने आई

सरकार द्वारा निर्धारित ₹14 प्रति किलोमीटर की दर से निर्धारित एंबुलेंस के दाम होने के बावजूद मनमर्जी से मुंह मांगे पैसे वसूलते नजर आए एंबुलेंस चालक, इसमें हॉस्पिटल के कर्मचारियों की मिलीभगत है, इस वसूली के खेल में अस्पताल में कार्यरत ठेकेदार के कर्मियों की मिलीभगत सामने आई, बाहर एंबुलेंस चाल कॉल करके बुलाते हैं और सौदेबाजी कर अपना कमीशन निश्चित करते हैं

नहीं थम रहा अस्पतालों में कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी का खेल

इसी के फलस्वरूप हम आपको ऐसी तो घटना बताएंगे जिससे यह साबित हो जाएगा कि इन अस्पतालों में शव को लाने ले जाने के लिए अवैध वसूली का नंगा नाच चल रहा है, जो कि कानूनन रूप से भी गलत है तथा मानवता के तौर पर भी गलत है :

एंबुलेंस केस -1 : एंबुलेंस ड्राइवर ने कहा कि जानकी रिस्क है, पैसा लूंगा तो ज्यादा लगेगा ही : ईएसआई अस्पताल में झाडोल के एक व्यक्ति की मौत हो गई, मौत कोरोनावायरस की वजह से हुई, अस्पताल में मौजूद सफाई कर्मी ने अपने परिचित एंबुलेंस वालों को बुलाया, उसने झाडोल शव ले जाने के ₹7000 की मांग की

मृतक के परिजनों ने ज्यादा पैसा बताने पर परिजन ने मना किया तो चालक बोला कि करो ना बॉडी है, हमारी जान का रिस्क है, पैसा तो अधिक लगेगा ही, आनाकानी पर ₹500 कम किए, कर्मी ने चालक ने अपना कमीशन लेकर बॉडी एंबुलेंस में रखी, सभी परिजन पीपी कीट पहन सबके साथ बैठे लेकिन चालक सिर्फ मुंह पर कपड़ा वाला मास्क लगाकर साथ चला, उसने किसी तरह की सेफ्टी नहीं अपना ही- यह एक प्रकार की लूट है जो बेबस और लाचार मृतक के परिवार वालों से यह एंबुलेंस वाले कर रहे हैं- प्रशासन से हमारे चैनल की अपील है कि इन पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें

एंबुलेंस कैस -2 : राज्य के बाहर के शव के एंबुलेंस चालक ने मांगे ₹25000 : ईएसआई अस्पताल में राज्य के बाहर के व्यक्ति की मौत हो गई, बेशक मौत कोरोनावायरस से हुई, एंबुलेंस चालक ने सीधे ही 25000 की मांग की, बाहर जाने पर एंबुलेंस चालकों ने भी वही पैसे मांगे, सभी चालकों के बीच तोड़- बट्टा करने पर 18000 में बात हुई

उसके बाद शव रखने के कर्मचारी ने ₹500 अलग से लिए, चालक ने एडवांस पैसे लिए और सब लेकर रवाना हुआ, पूरे रास्ते चालक ने भी मां के लिए कुछ नहीं पहना जबकि परिजन सभी पीपी किट में थे, ऐसे लापरवाह एंबुलेंस चालक अपनी जान तो खतरे में डाल ही रहे हैं साथ ही में अन्य लोगों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं, दूसरा यह है कि यह लोग, मजबूरी में मृतक के परिवार वालों से अवैध वसूली और मनचाहा पैसा वसूल रहे हैं वह पूर्णतया गलत है- उदयपुर जिला प्रशासन से हमारी अपील है कि ऐसे असामाजिक तत्व के साथ सख्ती के साथ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने की कृपा करें

बाहरी से पैसा वसूली : ईएसआई अस्पताल दिन में सवार की मौत होने पर अब परिजन निगम की एंबुलेंस से सबको सीधा शमशान ले जा रहे हैं, रात में मौत होने पर यह सब एमबी चिकित्सालय के मुर्दाघर भेजे जा रहे हैं, अगली सुबह नई व्यवस्था के तहत यह सब निशुल्क श्मशान घाट पहुंच रहे हैं, लेकिन जिले या जिले से बाहर जाने वाले सब के लिए एंबुलेंस चालक उन्हें कोरोना का डर दिखाकर मनमर्जी से पैसा वसूल रहे हैं-नहीं थम रहा अस्पतालों में कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी का खेल

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)

सरकार ने अब प्राणवायु के लिए सब्सिडी देने का किया ऐलान

हेल्थ रिपोर्ट/ उदयपुर/ जयपुर/ ई समाचार मीडिया/ देवेंद्र कुमार टाक : अब जो भी संस्था या व्यक्ति ऑक्सीजन प्लांट लगाएंगे उन्हें सरकार की ओर से कुल खर्च की 25% राशि सब्सिडी के रूप में दी जाएगी या उसे अधिकतम ₹50 लाख सरकार देगी, जिससे ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनी लगाने के लिए लोग और बड़े उद्योगकर्मी आगे आए और देश में राज्य में ऑक्सीजन की कमी नहीं हो-सरकार ने अब प्राणवायु के लिए सब्सिडी देने का किया ऐलान

मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन के लिए सरकार ने विशेष पैकेज की शुरुआत की है, देश-प्रदेश मैं बढ़ते कोरोना संक्रमण और ऑक्सीजन की मांग के अनुरूप आपूर्ति के लिए यह कवायद की गई हैं, यह शुरुआत का कई उद्योगपतियों ने स्वागत किया है तथा सरकार की सराहना की है कि यह कदम सरकार को कहीं समय पहले उठा लेना चाहिए था जिससे हमारे देश में ऑक्सीजन की कमी दूर हो जाती, परंतु कोई बात नहीं अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है अब आज से ही नहीं शुरुआत करेंगे

पैकेज में यह शामिल : प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोरा ने आदेश जारी किया कि पैकेज में प्रदेश में स्थित ऑक्सीजन निर्माता इकाइयों, नए उद्यमियों द्वारा एक करोड़ रुपए या उससे अधिक का निवेश मेडिकल ऑक्सीजन निर्माता विकास सुविधा स्थापित करने में किया जाता है तो संबंधित इकाइयां उद्यमी द्वारा निवेश की गई कुल पंजीकृत राशि का 25% या ₹50 लाख अधिकतम सीमा तक अनुदान देने का प्रावधान किया है

साथियों पिजन निर्माता इकाइयों की स्थापना के लिए जरूरी नियामक अनुमंतिया फास्ट ट्रेक मोड यानी तेजी से हो सकेगी, राजस्थान माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज 2019 के अधीन जरूरी निरीक्षण से 3 वर्ष तक उसे मुक्त रखा गया है, इसके लिए संबंधित को 30 सितंबर 2021 तक व्यवसायिक उत्पादन शुरू करना जरूरी होगा

सरकार को इसलिए लेना पड़ा यह निर्णय : कोरोना के उपचार में मेडिकल ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका वह जरूरत है कोरोना के संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत मरीजों को पर्याप्त मेडिकल ऑक्सीजन समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना राज्य सरकार के साथ निजी अस्पतालों के प्रबंधन के लिए चुनौती हैं

इस चुनौतीपूर्ण व कठिन समय में मरीजों को समय पर पर्याप्त मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सरकार ने जनहित में मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सरकार ने जनहित में मेडिकल ऑक्सीजन निर्माता इकाइयों, उद्यमियों को प्रदेश में मेडिकल उत्पादन प्लांट स्थापित करने के लिए प्रेरित करने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई हैं

उदयपुर में ऑक्सीजन को लेकर यह है स्थिति : उदयपुर में फिलहाल आदर्श व अर्नेस्ट से ऑक्सीजन सप्लाई मिल रही है तो दरीबा स्थित प्लांट से एमबी हॉस्पिटल को ऑप्शन मिल रही है एमबी का ही ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट होने से वहां से भी प्रतिदिन करीब 100 सिलेंडर उस दिन तैयार की जा रही है

जल्द ही आरएनटी में लगेगा दूसरा 20 केएल का लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट : आरएनटी मेडिकल कॉलेज यानी एमबी चिकित्सालय परिसर में 45 दिनों में ही नया 20 केएल का लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लग जाएगा, इससे मरीजों को राहत मिलेगी 20kl का प्लांट लगने के साथ ही यहां 2200  सिलेंडर रोज पढ़ने की व्यवस्था हो जाएगी

सरकार ने अब प्राणवायु के लिए सब्सिडी देने का किया ऐलान

एक साथ जल्दी 20kl ऑक्सीजन इस प्लान में डाली जाएगी तो 22 सिलेंडर अतिरिक्त मिल जाएंगे इससे बढ़ती कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या के बीच एक बड़ा बैकअप मिल पाएगा, पहले एमबी अस्पताल में 1 के एल का प्लांट स्थित है इससे 100-110 ऑक्सीजन सिलेंडर रोज भरे जाते हैं, परंतु अब 20 केरल का प्लांट लगने से 2200 ऑक्सीजन सिलेंडर रोज उपयोग में लिए जा सकेंगे, अब हमारे पास 2300 ऑक्सीजन सिलेंडर रोज उत्पादन की क्षमता हो जाएगी

20 केएल के नए प्लांट के लिए शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने अपने विधायक फंड से स्वीकृत की राशि : महाराणा भोपाल चिकित्सालय के कॉमेडी वार्ड के लिए लिक्विड ऑक्सीजन टैंक के लिए शहर विधायक व विश्व में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया विधायक कोटे से 74 लाख 81 हजार  रुपए स्वीकृत किए हैं,कटे नियर रांची जिला परिषद के जरिए एमपी चिकित्सालय को देने की स्वीकृति दी है

कटारिया ने कहा कि आरएनटी के प्राचार्य डॉक्टर लाखन पोसवाल ने इस टैंक की जरूरत इस समय बताएं, इस पर सीईओ जिला परिषद को यह राशि स्वीकार करने को कहा, राशि को लेकर स्वीकृति मिलते ही हमने तैयारी शुरू कर दी हैं हम 45 दिन में ही ऑक्सीजन प्लांट लग जाएंगे ताकि वो जल्द से जल्द मरीजों को कोई परेशानी ना हो- डॉक्टर लाखन पोसवाल ( प्राचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज)-सरकार ने अब प्राणवायु के लिए सब्सिडी देने का किया ऐलान

देवेंद्र कुमार टांक  E-समाचार.इन (जनता की आवाज)