उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा

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नेचर रिपोर्ट/ उदयपुर/ कुंभलगढ़/ ई समाचार मीडिया/ बेतवा भूमि समाचार/ देवेंद्र कुमार टाक : कोरोना टाइम में मेवाड़ के जंगल रोमांचित कर रहे हैं, संभाग में हुई मानसून की पहली बारिश के साथ ही पूरी अरावली पर्वतमाला मानव हरियाली से सज गई है इसके चलते पहाड़ हरे भरे हो गए हैं एवं जंगल भी सुहावने हो गए हैं-उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा-उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा

वन्यजीवों के लिए भी जंगलों में खाने के लिए पर्याप्त वनस्पति एवं जल की व्यवस्था भी होने लगी है, वर्षा ऋतु आते ही इन जीवो के लिए अपना पेट भरने के लिए जंगलों से शहरों की तरफ या गांव में भागने की जरूरत नहीं रहती है यह पूरी शांति के साथ जंगल में अपना जीवन यापन करते हैं एवं खाने-पीने की चीजें इनको प्रकृति से मिल जाती है

शहर से 20 किलोमीटर दूर रामा गांव में स्थित वन्य सेंचुरी में दो भालू दिखे हैं, 40 साल बाद भालुओं का ओपन मोमेंट देखने को मिला है, जिले में फुलवारी की नाल और कुंभलगढ़ से लगते सावन खंड में भालू है, जो शहर से 110 और 80 किलोमीटर दूर है, रामा में बालों की हथेलियों का वीडियो देखने वन्यजीव प्रेमी खुश हुए हैं तो दूसरी तरफ वन्य विशेषज्ञ हैरान हैं

एक्सपर्ट के मुताबिक 1980 से पहले शहर के आसपास के जंगलों में भालू थे, बाद में इनके दिखने की खबरें सामने आती रही लेकिन कभी भी पुष्टि नहीं हुई, पिछले साल से लॉकडाउन के दौरान जंगलों के आसपास इतनी गतिविधियां कम रही, फिर इस साल मई में ताऊते  कि तूफानी बारिश गर्मियों में भी जंगलों को हरा-भरा कर गई

इसलिए वन्यजीव सेंचुरी से बाहर आ रहे हैं, रामा सरपंच लक्ष्मीबाई ने बताया कि लोगों ने 5 माह पूर्व भी भालुओं का  होना बताया था, लेकिन देखा अब हैं, वन्य विभाग द्वारा गांव वालों को सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि भालू थोड़ी भी असुरक्षा महसूस करने पर हमला कर देते हैं

रामा पंचायत में दो भालुओं का मिलना bio-diversity के लिहाज से सुखद संकेत हैं, लेकिन यह क्षेत्र की आबादी के लिए अलर्ट भी है, वजह यह है भालू आक्रमक होते हैं वे तेंदुए से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं , उनकी नजर कमजोर होती हैं, लेकिन तुमने और सुनने की जबरदस्त क्षमता होती है, यह शिकार को जल्दी टारगेट कर लेते हैं

उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा

रिटायर्ड पीसीफ राहुल भटनागर के मुताबिक रामा में दिखे भालू संभावित या फुलवारी की नाल के हैं जो झाडोल, उबेश्वर, धार के जंगल से होते हुए भीलों का बेदला, डिंडोली तक पहुंचे हो, सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक डॉ सतीश शर्मा बताते हैं कि फुलवारी नाल के भालुओं का मूवमेंट पानरवा,खजुरिया नाल के रास्ते कुंभलगढ़ सेंचुरी और  जरगाजी तक भी रहता है

मौजूदा हालात में यह नहीं कहा जा सकता कि आहार की कमी या जुड़ा बनाने के लिए इन्होंने ठिकाना बदला हो, क्योंकि बारिश के बाद जंगल में ना वनस्पति की कमी है ना छोटे जीवो की, यह मूवमेंट भालुओं का ब्रीडिंग टाइम भी नहीं है,यह अंदेशा ज्यादा है कि लॉकडाउन के दौरान इंसानी हलचल कम देखकर भालू जंगलों से बाहर निकले हो और अनलॉक में लोगों की चहलकदमी शुरू होने से उनके रास्ते ब्लॉक हो गए हो

भालू के वितरण स्थल के आसपास की आबादी को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, विभाग को भी निगरानी करनी चाहिए, धामतली ( रामा) निवासी कृष्ण वीर सिंह झाला ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 7:00 बजे अपने दोस्तों के साथ अपने खेत पर गए थे, कुछ दूरी पर काले रंग का आकार दिखा, जिस में हलचल थी-उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा-उदयपुर के रामा वन क्षेत्र में दिखा भालुओं का जोड़ा

कुछ कदम बढ़ाए तो  मैं यह जानकर चौक गया कि यह एक भालू था की यह एक भालू था, वीडियो बना ही रहा था कि सामा बालू पहाड़ी की तलहटी में देखते ही देखते ओझल हो गया, यही बालू शनिवार शाम भी दिखा, जो लगभग 1 घंटे तक खेत और पहाड़ी पर घूमता रहा,भालुओं की अठखेलियां का वीडियो 10 दिन पहले का है, तब यह बालू 5 कि मी दूरी जिन डोली में थे, किस वन क्षेत्र में जामुन, करौंदे और खजूर के काफी पेड़ हैं हो सकता है कि भालू इन्हीं की तलाश में इधर आए हो

रिपोर्ट : देवेंद्र कुमार टांक E-समाचार.इन (जनता  की  आवाज)

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